मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने जनता की सेहत से खिलवाड़ रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने पूरे राज्य में एनालॉग यानी नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, सप्लाई और बिक्री पर एक साल की पूरी पाबंदी लगा दी। यह सख्त कदम खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 30(2)(ए) के तहत उठाया गया है।
ऑफिशियल गजट में नोटिफिकेशन जारी होते ही यह नया आदेश पूरे राज्य में तुरंत लागू माना जाएगा। जो भी कारोबारी इसका उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
इस कड़े फैसले के पीछे प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट और सैंपल के आंकड़े हैं।
एफडीए के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच पूरे महाराष्ट्र से पनीर के कुल 308 सैंपल जुटाए गए थे। जब इनकी सरकारी लैब्स में जांच की गई तो इनमें से 109 सैंपल यानी लगभग 35.4% तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से 79 सैंपल सब-स्टैंडर्ड पाए गए, जबकि 30 सैंपल इतने घटिया थे कि उन्हें सीधे अनसेफ घोषित कर दिया गया। जांच में साफ हुआ कि असली दूध की वसा निकालकर उसकी जगह सस्ते वेजिटेबल ऑयल और गैर-डेयरी तत्वों की मिलावट की जा रही थी।
सेहत के लिए क्यों खतरनाक है एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर असल में असली दूध या डेयरी प्रॉडक्ट से नहीं बनता, बल्कि इसे नॉन-डेयरी केमिकल और वेजिटेबल फैट मिलाकर तैयार किया जाता है। एफडीए अधिकारियों के अनुसार इस तरह के नकली प्रॉडक्ट के लिए कोई तय फूड स्टैंडर्ड्स मौजूद नहीं हैं, जिससे यह सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि धारा 30(2ए) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए यह बैन लगाया गया है। अब राज्य में किसी भी रेस्टोरेंट, डेयरी या दुकान पर नॉन-डेयरी पनीर की मौजूदगी गैर-कानूनी मानी जाएगी।