प्रधानमंत्री के आह्वान का उल्टा असर, स्वर्ण आभूषणों की बिक्री में 18% से 20% तक उछाल!

सरकारी पाबंदी के डर से उमड़ी खरीदारों की भीड़, सोने के दाम और मांग दोनों आसमान पर!

     नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने एक वर्ष तक स्वर्ण निवेश से दूरी बनाने के आग्रह ने बाजार में अप्रत्याशित हलचल पैदा कर दी। सरकार की इस अपील के बाद जनता के बीच सोने पर पूर्ण प्रतिबंध या करों में भारी वृद्धि की आशंका गहरा गई, जिसके परिणामस्वरूप देशभर के सर्राफा बाजारों में खरीदारों का सैलाब उमड़ पड़ा है। इस स्थिति ने ‘पैनिक बाइंग’ यानी घबराहट में की जाने वाली खरीदारी को जन्म दिया है। गौरतलब है कि सरकार ने हाल ही में आयात शुल्क में भी बढ़ोतरी की है, जिससे ग्राहकों का डर और पुख्ता हो गया है।
    बीते मंगलवार को बाजार बंद होने तक बिना किसी अतिरिक्त कर के 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1,51,632 रुपये प्रति दस ग्राम दर्ज की गई। वहीं, 22 कैरेट और 18 कैरेट श्रेणी के स्वर्ण के भाव भी क्रमशः 1,38,895 रुपये और 1,13,724 रुपये के उच्च स्तर पर रहे।

विवाहों के लिए खरीददारी
     व्यापारियों का कहना है कि जून से लेकर मध्य दिसंबर तक चलने वाले वैवाहिक आयोजनों के लिए लोग समय से काफी पहले ही आभूषणों का प्रबंध कर रहे हैं। अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद के प्रमुख राजेश रोकड़े के अनुसार, पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर वधू-श्रृंगार से संबंधित आभूषणों की बिक्री में पंद्रह से बीस प्रतिशत की तीव्र वृद्धि देखी गई है। स्थिति यह है कि बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों में प्रतिदिन का कारोबार लगभग 25 लाख रुपये तक पहुँच गया है, जबकि मध्यम श्रेणी के दुकानदार भी रोजाना 18 लाख रुपये तक का व्यापार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की अपील के बाद फैली विभिन्न अफवाहों और भविष्य की कठोर सरकारी नीतियों के डर ने इस तेजी को हवा दी है।

अपील से लोगों में भय व्याप्त
     विवाहों के लिए अग्रिम तैयारी में जुटे लोग केवल वर्तमान समय की ही नहीं, बल्कि आगामी सर्दियों के मौसम की भी चिंता कर रहे हैं। जॉय अलुक्कास समूह के प्रबंध निदेशक वर्गीस अलुक्कास ने साझा किया कि नवंबर और दिसंबर में होने वाले विवाह कार्यक्रमों के लिए भी लोग अभी से खरीदारी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि भविष्य में सरकार सोने के क्रय-विक्रय पर पूरी तरह रोक लगा सकती है। मुंबई के प्रसिद्ध झावेरी बाजार में भी कारोबार बीस प्रतिशत तक बढ़ गया है, जहाँ हर तरफ नई सरकारी नीतियों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।

दक्षिण भारत में भी भारी तेजी
     उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय हो रही 60% खरीदारी आने वाले वैवाहिक सीजन को ध्यान में रखकर की जा रही है। दक्षिण भारत में भी भारी आभूषणों की मांग में तेजी आई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में स्वर्ण का विशेष भावनात्मक महत्व है, इसलिए लोग नकदी पर रोक या शुल्क वृद्धि की आशंका से भयभीत होकर बाजारों की ओर भाग रहे हैं। इस बीच, स्वर्ण व्यापारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से संवाद करने की इच्छा जताई है। उनका प्रस्ताव है कि घरों में रखे हुए सोने को मुख्य अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाकर आयात पर देश की निर्भरता को सफलतापूर्वक कम किया जा सकता है।

Leave a Comment