दिल्ली में सेवा, गांव में शिकंजा, जंतर-मंतर पर भोजन बांटने वाले जुनैद के घर दबिश दे रही पुलिस, नाहल गांव से मेरठ तक पहुंची जांच!

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल छात्रों के लिए लगातार भोजन और पेयजल का प्रबंध करने वाले मोहम्मद जुनैद मलिक का परिवार इन दिनों भारी मानसिक तनाव से गुजर रहा है। गाजियाबाद जिले के मसूरी थाना अंतर्गत नाहल गांव निवासी जुनैद के इस सेवा कार्य के बाद स्थानीय पुलिस उनके परिजनों पर दबाव बना रही है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि पुलिस की इस कार्रवाई से परिवार के सदस्य भयभीत हैं और जुनैद की मां का स्वास्थ्य अत्यधिक खराब हो चुका है।
जानकारी के अनुसार, मसूरी पुलिस की टीम पिछले कुछ दिनों में कई बार जुनैद के आवास पर पहुंची और परिजनों से विभिन्न कागजातों का विवरण हासिल किया। जुनैद के पिता मुस्तफा ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पुत्र बचपन से ही जनसेवा के कार्यों से जुड़ा रहा है और जंतर-मंतर पर भोजन उपलब्ध कराना कोई अपराध नहीं है।
पुलिस कार्रवाई का सिलसिला 23 जुलाई की शाम लगभग 5 बजे आरंभ हुआ, जब मसूरी पुलिस की एक टीम नाहल गांव पहुंची। पुलिस कर्मियों ने घर में मौजूद कागजातों की जांच की और तत्पश्चात मुस्तफा को अपने साथ थाने ले गई। थाने में मुस्तफा से पहचान पत्र, स्थायी खाता संख्या, बैंक खाते की विवरणी सहित कई अन्य महत्वपूर्ण कागजातों के संदर्भ में विस्तार से प्रश्न पूछे गए।
लगभग छह घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस ने मुस्तफा को रात 11 बजे वापस घर जाने दिया। किंतु, यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। अगले दिन पुनः मुस्तफा को पुलिस स्टेशन तलब किया गया और पूरा दिन पूछताछ के उपरांत ही छोड़ा गया। पुलिस का यह जांच चक्र गाजियाबाद तक ही सीमित नहीं रहा; 24 जुलाई की प्रातः काल पुलिस की एक अन्य टीम मेरठ स्थित जुनैद की बड़ी बहन के ससुराल भी जा पहुंची, जहां उनके ससुर से भी गहन पूछताछ की गई।
जुनैद का परिवार पूरी तरह से कृषि कार्य पर निर्भर है। जुनैद ने हाल ही में अपनी विधि स्नातक (एलएलबी) की शिक्षा पूर्ण की है। एक ओर जहां जुनैद अपने इस सामाजिक कार्य के कारण चर्चा के केंद्र में हैं, वहीं दूसरी ओर उनके रिश्तेदारों और परिजनों को जिस प्रकार पुलिसिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है, उससे पूरे गांव में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

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