टिन्नू के भाई का चंपत राय और अनिल मिश्रा पर आरोप, खुद को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाया !

अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया। इस पूरे प्रकरण में मुख्य आरोपी बनाए गए राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के भाई दिनेश यादव ने पहली बार मीडिया के सामने आकर सनसनीखेज दावे किए। दिनेश यादव ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा पर अपने भाई को जानबूझकर इस साजिश में फंसाने का सीधा और खुला आरोप मढ़ा है। दिनेश ने अपने भाई टिन्नू को पूरी तरह बेकसूर बताते हुए कहा कि ट्रस्ट के बड़े रसूखदार पदाधिकारी खुद पर आने वाली आंच को टालने और अपनी गर्दन बचाने के लिए छोटे दर्जे के कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रहे हैं।
इस बीच, मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने अपना शिकंजा और मजबूत कर लिया है। जांच एजेंसी ने अब इस महाघोटाले की तह तक जाने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के पिछले 5 सालों के वित्तीय ऑडिट की दोबारा बारीकी से जांच करने का एक बड़ा फैसला लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने भी एसआईटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। इसके साथ ही पुलिस ने मामले के अन्य आरोपियों अविनाश, लवकुश और करुणेश के अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के जेवरात और एक बेहद संदिग्ध संदूक भी बरामद किया है।

दिनेश यादव ने चाबियों के गणित पर उठाए सवा
आरोपी टिन्नू यादव के भाई दिनेश यादव ने ट्रस्ट के आला अफसरों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उनका भाई पिछले 20 सालों से पूरी निष्ठा के साथ चंपत राय के साथ साए की तरह काम कर रहा था। टिन्नू का रिकॉर्ड हमेशा साफ-सुथरा रहा है और उसका स्वभाव इतना अच्छा है कि आज तक उस पर कोई छोटा सा मुकदमा भी दर्ज नहीं हुआ। दिनेश ने बेहद तल्ख लहजे में आरोप लगाया कि इस बड़ी चोरी का भंडाफोड़ होते ही चंपत राय और अनिल मिश्रा ने बड़ी चालाकी से पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने आगे बताया कि दान पेटी को खोलने वाली दो चाबियों में से एक चाबी टिन्नू के पास रहती थी और दूसरी चाबी बैंक के कर्मचारियों के पास सुरक्षित होती थी। ऐसे में अकेले उनके भाई को दोषी ठहराना सरासर गलत है। दिनेश के मुताबिक, जो शख्स खुद 18 से 20 लाख रुपए की हैसियत रखता हो, वह महज 1 लाख रुपये जैसी छोटी रकम की चोरी के लिए अपना पूरा जीवन और इज्जत दांव पर क्यों लगाएगा।

ट्रस्ट के दफ्तर प्रभारी ने बैंक को जिम्मेदार ठहराया
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बातचीत के दौरान एक अलग ही थ्योरी पेश की है। उन्होंने इस पूरी वित्तीय गड़बड़ी और चोरी के लिए सीधे तौर पर संबंधित बैंक को आड़े हाथों लिया है। प्रकाश गुप्ता का कहना है कि बैंक के साथ हुए लिखित समझौते (एग्रीमेंट) के मुताबिक दानपेटी से चढ़ावे की रकम को सुरक्षित बाहर निकालने, उसकी पूरी गिनती करने और उसे बैंक खाते में जमा कराने की मुकम्मल जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ बैंक की ही थी। बैंक ने बिना किसी कड़े सत्यापन (वेरिफिकेशन) के महज सिफारिशों के आधार पर बाहरी लोगों को इस बेहद संवेदनशील काम पर रख लिया। इसके साथ ही उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव का पुरजोर बचाव करते हुए उन्हें पूरी तरह ईमानदार बताया और कहा कि ऐसे पवित्र लोगों की नियत पर शक करना सूरज को दीया दिखाने के बराबर है।

एसआईटी के निशाने पर आए ट्रस्ट के बड़े चेहरे
भले ही ट्रस्ट के भीतर से बड़े पदाधिकारियों को क्लीन चिट दी जा रही हो, लेकिन इस महाघोटाले की कमान संभाल रही एसआईटी की रडार पर अब सीधे तौर पर ट्रस्ट के बड़े-बड़े कर्णधार आ चुके हैं। जांच टीम द्वारा की गई हालिया पूछताछ के दौरान वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल मिश्रा ने इस पूरी चोरी का ठीकरा अकेले टिन्नू यादव के सिर पर फोड़ते हुए खुद को पूरी तरह निर्दोष करार दिया है। हालांकि, उन्होंने इस बात को जरूर कबूल किया कि ट्रस्ट के स्तर पर दान की निगरानी में कुछ बड़ी चूक और लापरवाही जरूर हुई है। एसआईटी की टीम अब सिर्फ इस चोरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह ट्रस्ट के तहत चल रहे तमाम बड़े निर्माण कार्यों, भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन, कंपनियों को किए गए भुगतान की प्रक्रियाओं और देश-विदेश से दान में मिले सोने-चांदी के जेवरातों के मूल रिकॉर्ड की भी गहराई से स्क्रूटनी कर रही है ताकि इस पूरे घोटाले के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

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