एसआईटी की रिपोर्ट के बाद चंपत राय की 9 पेज की चिट्ठी, पर चढ़ावा चोरी मामले पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं!

नई दिल्ली। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपनी बात सामने रखी है। उन्होंने 9 पेज की एक विस्तृत चिट्ठी जारी कर राम मंदिर की व्यवस्था, आर्थिक लेन-देन और मंदिर निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का जिक्र किया है। हालांकि, पत्र में चढ़ावा चोरी के मामले पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की गई।
जांच के दौरान चंपत राय ने कहा था कि जब तक विशेष जांच दल अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट नहीं दे देता, तब तक वह इस मामले पर कुछ नहीं कहेंगे। अब रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने पत्र के जरिए अपनी बात रखी है।

मंदिर के 3 बैंक खातों का किया जिक्र
चंपत राय ने पत्र में ट्रस्ट के 3 बैंक खातों की जानकारी देते हुए कहा है कि इन खातों के लिए कोई चेकबुक जारी नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन खातों से सभी भुगतान ऑनलाइन किए जाते हैं। इसके अलावा ट्रस्ट के आंतरिक लेखा परीक्षण का काम अलग-अलग संस्थाओं से कराया जाता है। पत्र में उन्होंने यह भी बताया कि राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से सरकार को सभी जरूरी करों का भुगतान किया जाता है। इनमें जीएसटी, टीडीएस, स्टांप शुल्क, श्रम उपकर, भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा सहित अन्य देनदारियां शामिल हैं।

दर्शन से लेकर आरती और प्रसाद तक कोई शुल्क नहीं
चंपत राय ने मंदिर की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर में दर्शन, सेवा, आरती और प्रसाद के लिए श्रद्धालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। पूजा के लिए भी किसी तरह की दक्षिणा नहीं ली जाती है। उनकी चिट्ठी में मंदिर की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई बातें रखी गई हैं। उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि उनके कार्यकाल में ट्रस्ट के कामकाज में निर्धारित नियमों का पालन किया गया। चढ़ावे में हुई कथित गड़बड़ी को उन्होंने छोटे स्तर पर हुई अनियमितता से जोड़कर देखा है।

मंदिर निर्माण के फैसलों में ट्रस्ट की सीधी भूमिका नहीं
चिट्ठी में चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का कई बार उल्लेख किया है। उन्होंने साफ किया कि मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले नृपेंद्र मिश्रा की देखरेख में लिए जाते हैं और इस काम में ट्रस्ट का सीधा हस्तक्षेप नहीं है।
इस बीच नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर निर्माण को लेकर बताया है कि राम मंदिर का निर्माण कार्य 30 सितंबर तक पूरा हो जाएगा। निर्माण में लगी कंपनियां 30 अक्टूबर तक मंदिर परिसर से बाहर चली जाएंगी। इससे मंदिर निर्माण के अंतिम चरण की समय सीमा भी स्पष्ट होती है।

2 सप्ताह से अयोध्या में साधु-संतों से मुलाकात
एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद चंपत राय की सक्रियता भी बढ़ी है। हालांकि, उनकी गतिविधियां पिछले 2 सप्ताह से ही बढ़ी हुई थीं। वह अयोध्या के अलग-अलग मठों और मंदिरों में जाकर साधु-संतों से मुलाकात कर रहे हैं। उनके साथ अनिल मिश्रा भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। चढ़ावा चोरी मामले की जांच पूरी होने और अंतिम रिपोर्ट में क्लीन चिट मिलने के बाद चंपत राय ने अब 9 पेज की चिट्ठी के जरिए राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था और निर्माण से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखा है। पत्र में उन्होंने मंदिर के आर्थिक संचालन से लेकर निर्माण कार्य की जिम्मेदारियों तक कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है।

Leave a Comment