कैम्ब्रिज। आध्यात्मिक मार्गदर्शक मोरारी बापू की रामकथा का भव्य आयोजन कैम्ब्रिज स्थित यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध सैंडर्स थिएटर में हो रहा है। 15 अगस्त से आरंभ हुई यह नौ दिवसीय राम कथा 23 अगस्त तक जारी रहेगी। इस आध्यात्मिक समागम में भारत के अलग-अलग प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों से आए प्रख्यात साधु-संतों और विचारकों का जमावड़ा लगा है। इस आयोजन के बीच 16 से 18 अगस्त के मध्य तीन दिनों तक विद्वानों की विशेष परिचर्चा भी संपन्न की गई।
सत्य, प्रेम के संदेश के साथ मनाई गई तुलसी जयंती
इस आयोजन के दौरान 19 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन जयंती पूरी श्रद्धा से मनाई गई। कथा के संबंध में मोरारी बापू ने बताया कि सावन मास में आयोजित यह कार्यक्रम वर्ष 2010 में उनके द्वारा शुरू की गई उस मुहिम का विस्तार है, जिसका मुख्य उद्देश्य रामकथा और रामचरितमानस की महान परंपरा को सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि संतों ने यहां ज्ञान का दीप नहीं, बल्कि प्रेम की अलख जगाई है। इस पूरे अनुष्ठान का मुख्य केंद्र सत्य, अहिंसा, प्रेम और करुणा के सिद्धांतों को जीवन में उतारना है।
सांस्कृतिक यात्रा और वैश्विक मूल्यों का मिलन
हार्वर्ड के लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट की संकाय निदेशक प्रोफेसर डायना के अनुसार, भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की अयोध्या से प्रारंभ होकर प्रयाग, चित्रकूट, पंचवटी, किष्किंधा से रामेश्वरम तक की 14 वर्षों की यात्रा ने इन स्थलों को पवित्र तीर्थों में रूपांतरित कर दिया। यही यात्रा आगे चलकर भारत के अतिरिक्त थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया जैसे देशों में फैली रामलीला की परंपरा का आधार बनी। वहीं ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य डी पोपट ने कहा कि हार्वर्ड का मूल वाक्य ‘वर्तीअस’ (सत्य) बापू के सत्य, प्रेम और करुणा के विचारों से गहरा तालमेल रखता है। आयोजन समिति के सदस्य पी पोपट ओबे के मुताबिक, बापू इससे पहले कैम्ब्रिज, वेटिकन, कैलाश मानसरोवर और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रामकथा कर चुके हैं। इस बार चित्रकूट, अयोध्या और काशी से पधारे संतों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम ज्ञान के इस सबसे बड़े केंद्र और प्राचीनतम पाठ्य परंपराओं को एक मंच पर लाने का ऐतिहासिक प्रयास सिद्ध हो रहा है।