इंदौर। रेल सुविधाओं के मामले में इंदौर को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। रेलवे ने हाल ही में हिसार-बड़ौदा समेत तीन स्पेशल ट्रेनों को नियमित करते हुए उन्हें सुपरफास्ट का दर्जा भी दे दिया, लेकिन इंदौर की किसी भी स्पेशल ट्रेन को पक्का नहीं किया गया। पिछले दो महीनों में यह दूसरा मौका है जब शहर की इस मांग को दरकिनार किया गया है। रेलवे ने केवल इंदौर-पटना और इंदौर-पुणे (हडपसर) एक्सप्रेस के फेरे बढ़ाने पर ही संतोष जताया है।
इससे पहले भी मई-जून के दौरान मुंबई, सूरत, मालदा, भावनगर और श्रीगंगानगर जैसे शहरों की 12 स्पेशल ट्रेनों को नियमित सेवा में बदला गया था, तब भी इंदौर का खाता खाली ही रहा था। इस लगातार हो रही अनदेखी पर रेल विशेषज्ञों ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है, जबकि स्थानीय सांसद शंकर लालवानी ने जल्द ही इस संबंध में रेल मंत्री से मुलाकात करने की बात कही है।
जीएम के आश्वासनों के बावजूद स्थिति जस की तस
शहर की रेल समस्याओं को लेकर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने हाल ही में पश्चिम रेलवे के जीएम को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था। इसके अलावा पिछले महीने जब पश्चिम रेलवे के जीएम रमणाथ पांडेय इंदौर प्रवास पर आए थे, तब भी स्पेशल ट्रेनों को नियमित न किए जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया था। उस समय जीएम ने मामले पर ध्यान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव देखने को नहीं मिला। वर्तमान में इंदौर से मुंबई (दो एसी एक्सप्रेस), पटना, हडपसर, श्रीगंगानगर और दिल्ली के लिए स्पेशल ट्रेनें संचालित की जा रही हैं, जिन्हें नियमित किए जाने का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
यात्रियों की जेब पर पड़ रही भारी मार और भारी वेटिंग की समस्या
स्पेशल ट्रेनों का संचालन विशेष किराए की दरों पर होता है, जिससे यात्रियों को सामान्य से अधिक किराया चुकाना पड़ता है। ट्रेनों के नियमित होने से किराए में 30 फीसदी तक की कमी आती है, जिसका सीधा लाभ आम यात्रियों को मिलता। आंकड़े बताते हैं कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस में आम दिनों में भी यात्रियों का दबाव 140 फीसदी से अधिक रहता है, वहीं मुंबई और पुणे रूट पर भी लंबी वेटिंग लिस्ट बनी रहती है। पैसेंजर एमेनिटीज कमेटी के पूर्व सदस्य और रेल विशेषज्ञ नागेश नामजोशी का कहना है कि इंदौर जैसे बड़े व्यापारिक केंद्र की लगातार उपेक्षा करना पूरी तरह से अनुचित है और यहां रेल सेवाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है।