अनिका के इलाज पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार से पूछा ‘क्या यह बच्ची लाड़ली बहना नहीं !

इंदौर। गंभीर बीमारी से जूझ रही ढाई वर्षीय अनिका के इलाज का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ तक पहुंच गया है। बच्ची को बचाने के लिए करीब 9 करोड़ रुपए कीमत के एक विशेष इंजेक्शन की आवश्यकता है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि क्या यह बच्ची प्रदेश की लाड़ली बहना नहीं है।
अनिका की ओर से अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि यदि लाड़ली बहना योजना की प्रत्येक हितग्राही को मिलने वाली राशि में केवल 2 रुपए की कटौती कर दी जाए तो अनिका के उपचार के लिए जरूरी पूरी रकम आसानी से जुटाई जा सकती है और एक मासूम की जान बचाई जा सकती है।

अनिका कठिन लड़ाई लड़ रही
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि अनिका समय के साथ एक कठिन लड़ाई लड़ रही है। उसकी स्थिति ऐसी है कि वह पिछले कई महीनों से केवल लिक्विड डाइट पर निर्भर है। चिकित्सकों के अनुसार जिस इंजेक्शन की उसे आवश्यकता है, उसे लगाने के लिए बच्ची का वजन 13 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। ऐसे में उपचार के लिए हर दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

8 करोड़ रुपए एकत्र, एक करोड़ की कमी
परिजनों, समाजसेवियों और विभिन्न लोगों के सहयोग से अब तक लगभग 8 करोड़ रुपए की राशि एकत्र की जा चुकी है, लेकिन इलाज के लिए अभी भी करीब 1 करोड़ रुपए की जरूरत बनी हुई है। अनिका का उपचार दिल्ली स्थित एम्स में प्रस्तावित है। हालांकि अदालत में यह जानकारी भी दी गई कि अब तक एम्स की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।

आवश्यक कदम उठाने की अपेक्षा
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों से आवश्यक कदम उठाने की अपेक्षा जताई है। अदालत ने अगली सुनवाई 22 जून निर्धारित की है। अब अनिका के परिवार के साथ-साथ प्रदेशभर के लोग भी इस सुनवाई पर नजर लगाए हुए हैं, जहां उसके इलाज और आर्थिक सहायता से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।

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