भोपाल। लोकसेवा आयोग व सरकारी विभागों के बीच तालमेल न होने से युवाओं का भविष्य अधर में! ‘कैग’ की जांच में सामने आया कि ऊर्जा, उद्योग नीति, जेल, आवास बोर्ड व लोक स्वास्थ्य जैसे विभागों ने 101 रिक्त पदों की सूचना भेजने में 31 से 68 महीने लगा दिए। इस देरी से सिर्फ 25 पदों पर ही भर्ती आगे बढ़ सकी, बाकी प्रक्रिया रुक गई। 2018 से 2023 तक प्रस्तावित 44 परीक्षाओं में केवल 28 पर विज्ञापन निकले, शेष 16 पर कोई कदम नहीं उठा।
आयोग ने 12,336 पदों के लिए 94 विज्ञापन जारी किए, लेकिन 30 पर औसत 136 दिन की देरी हुई। नियमों के मुताबिक परीक्षा 6-18 महीने में होनी चाहिए थी, मगर चयन में 25 महीने तक लग गए। इससे 3,100 पद प्रभावित हुए, साथ ही इंटरव्यू बोर्ड अधूरे रहे व पेपर सेटर पैनल पुराना पड़ा।

आरक्षण विवादों ने लटकाई भर्तियां
उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक के 2,371 पदों पर 2016 की अधिसूचना के बाद चार साल लगे परीक्षा कराने में। दिव्यांग कोटा की गिनती पर बार-बार बदलाव ने मामला उलझा दिया। रिक्त पदों की जांच के लिए कोई ठोस व्यवस्था न होने से भर्तियां अदालती झगड़ों में फंसती रहीं।
सुधार के उपाय सुझाए कैग ने कैग ने
केरल लोकसेवा आयोग की तर्ज पर एक महीने की समयसीमा तय करने को कहा। सामान्य प्रशासन विभाग ने खाली पदों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने की बात कही, जो विज्ञापन में देरी रोकेगा। वेटिंग लिस्ट प्रबंधन व पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि युवा परेशान न हों।
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