पानी की जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट में मिलावट और उसके दूषित होने की तरफ ही इशारा
भोपाल। मुख्यमंत्री ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों में जिम्मेदारी तय करते हुए नगर निगम कमिश्नर को हटाने और दो बड़े अधिकारियों को सस्पेंड करने के आदेश दिए। इंदौर में दूषित पानी के कारण उत्पन्न हुई गंभीर स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मुख्य सचिव सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस पूरे प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने राज्य शासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाइयों का भी जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर गहन चर्चा की और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
दूषित पानी मामले में इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया। नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया। गंदे पानी पीने से हुई मौत मामले में अब शुरुआती रिपोर्ट आ गई। जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट में पानी में मिलावट और उसका दूषित होने की तरफ ही इशारा किया गया है। सरकार इस मामले में अब डिटेल रिपोर्ट मंगवाई है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी।
देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के कारण 15 लोगों की जान गई। जबकि, करीब 200 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। मरने वालों की संख्या को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दूषित पानी से मरने वालों की संख्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। परिजनों और अस्पतालों के मुताबिक अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हुई। सभी मरीज उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के साथ भर्ती हुए थे. कुछ को बुखार भी था। मृतकों में पांच महीने का एक शिशु और बुजुर्ग लोग भी शामिल हैं।
इस सिलसिले में शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के महापौर, अध्यक्ष और आयुक्त, जिला कलेक्टरों तथा स्वास्थ्य विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक बुलाई गई, जिसमें पूरे प्रदेश की समीक्षा की गई।