इंदौर की हिंदी पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक ‘हिंदी पत्रकारिता का इंदौर घराना’ का विमोचन!

इंदौर की हिंदी पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक ‘हिंदी पत्रकारिता का इंदौर घराना’ का विमोचन!

इंदौर। देश की हिंदी पत्रकारिता में अपनी भाषा की शुद्धता, व्याकरण की कसौटी और खबरों की विश्वसनीयता के लिए पहचानी जाने वाली इंदौर की पत्रकारिता परंपरा को अब एक दस्तावेज के रूप में सहेज लिया गया। इसी समृद्ध परंपरा और उसके विकास को केंद्र में रखकर वरिष्ठ पत्रकार हेमंत पाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘हिंदी पत्रकारिता का इंदौर घराना’ का विमोचन ‘राष्ट्रीय पत्रकारिता महोत्सव’ के दौरान भव्य समारोह में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र तोमर ने किया।



विधानसभा अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि इंदौर की पत्रकारिता पर लिखी गई ये पुस्तक निश्चित रूप से पठनीय होगी। क्योंकि, अभी तक इस विषय पर विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की नई पीढ़ी के लिए इस किताब से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। उन्हें इंदौर के उन सप्तऋषि संपादकों के काम को जानने के लिए यह पुस्तक अच्छा माध्यम होगी।

इंदौर की पत्रकारिता परंपरा के इस पहले विस्तृत अध्ययन में इंदौर की हिंदी पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं को समेटते हुए 26 अध्याय शामिल किए गए हैं। पुस्तक में शहर की पत्रकारिता की विशेषताओं के साथ उन मूर्धन्य पत्रकारों के अमूल्य योगदान को भी गहराई से रेखांकित किया गया, जिन्होंने इंदौर को हिंदी पत्रकारिता में एक अलग और प्रतिष्ठित पहचान दिलाई। लेखक ने इंदौर के अखबारों की भाषा, उसकी शुद्धता, संपादन की परंपरा और खबरों की विश्वसनीयता के मानकों का भी बारीकी से विश्लेषण किया है।

पुस्तक के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि किस तरह इंदौर की पत्रकारिता ने भाषा और खबरों के स्तर पर अपनी एक स्वतंत्र परंपरा विकसित की। यह इंदौर की हिंदी पत्रकारिता पर केंद्रित अपनी तरह का पहला विस्तृत अध्ययन है, जिसमें यहां की पत्रकारिता परंपरा की विशेषताओं और उसे गढ़ने वाले पत्रकारों के संघर्षों को विस्तार से पन्नों पर उतारा गया है।

इस पुस्तक की एक और खास विशेषता यह है कि इसमें सुबह प्रकाशित होने वाले अखबारों के अलावा शाम के अखबारों का भी बहुत गंभीरता से जिक्र किया गया है। जिस तरह सुबह पाठक दैनिक समाचार पत्रों के माध्यम से दिन की शुरुआत करते थे, उसी तरह दोपहर और शाम के समय शहर की नब्ज जानने के लिए सांध्यकालीन अखबारों का इंतजार किया जाता था। इंदौर के शाम के अखबार केवल खबरों के शीर्षक तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने शहर की सामाजिक, राजनीतिक और व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल पाठकों तक पहुंचाने में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

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