अंकिता भंडारी केस: राहुल गांधी की राष्ट्रपति को चिट्ठी, CBI जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकने की मांग
नई दिल्ली। उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने सीबीआई जांच पूरी होने तक गौतम को पदभार न सौंपने का अनुरोध किया है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ने कथित तौर पर एक वीआईपी की मांग मानने से इनकार किया था। उन्होंने मामले में कथित वीआईपी की पहचान अब तक स्पष्ट न होने पर सवाल उठाए और जांच की गति को लेकर चिंता जताई। राहुल गांधी ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को अदालत में सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। उनकी कथित भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों और जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराया था और मई 2025 में तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर अंकिता के परिवार और अन्य लोगों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार की मांग है कि इस पहलू की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई अन्य व्यक्ति अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से क्या अपील की?
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार को दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की सलाह दी जाए और जांच पूरी होने तक उन्हें राज्यपाल का पदभार न सौंपा जाए। उन्होंने अपने पत्र में राज्यपाल के संवैधानिक पद से जुड़ी कानूनी सुरक्षा का भी उल्लेख किया है।
इस मांग के पीछे राहुल गांधी का तर्क है कि मामले की जांच पूरी होने और कथित वीआईपी पहलू स्पष्ट होने तक नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान होना चाहिए। यह उनकी राजनीतिक और कानूनी दलील है; नियुक्ति के प्रभाव और संवैधानिक प्रावधानों का अंतिम आकलन संबंधित कानून और सक्षम संस्थाओं के आधार पर ही किया जा सकता है।
अंकिता के माता-पिता की हिरासत पर भी सवाल
अंकिता भंडारी के माता-पिता ने कथित वीआईपी एंगल की जांच और न्याय की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के संयोजक पीसी तिवारी ने भी इस मामले में सरकार और भाजपा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को किसी संवैधानिक पद का कार्यभार न सौंपा जाए। तिवारी ने अंकिता के माता-पिता की हिरासत पर भी आपत्ति जताई।
अब आगे क्या?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन कथित वीआईपी पहलू को लेकर परिवार की मांग और राजनीतिक बहस जारी है। अब ध्यान इस बात पर है कि सीबीआई जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और राष्ट्रपति तथा केंद्र सरकार नियुक्ति को लेकर उठाई गई मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।
मामले में निष्पक्ष जांच, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जवाबदेही और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है।

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