ग्वालियर ट्रक हादसा: एक ही परिवार से उठीं 3 अर्थियां, हादसे के बाद जागी सरकार, आनन-फानन में कार्रवाई!
ग्वालियर: शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण ट्रक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। दशहरे से पहले जहां घरों में त्योहार की तैयारियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा है। गदाईपुरा की गलियों में अपनों को खोने का दर्द साफ दिखाई दे रहा है। सबसे दुखद मंजर तब देखने को मिला, जब एक ही परिवार से तीन अर्थियां उठीं। हादसे में अब तक 15 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायल अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
एक ही परिवार से उठीं तीन अर्थियां
ग्वालियर के गदाईपुरा क्षेत्र के माधवी नगर में अशोक त्यागी और उनके दो मासूम भतीजे लव और अमन की मौत से परिवार टूट गया। तीनों के शव मुरैना जिले के जौरा स्थित पैतृक गांव ले जाए गए। बताया गया कि अशोक ने बच्चों को साथ ले जाने से मना किया था, लेकिन उनकी जिद के आगे वह उन्हें साथ ले गए। किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
वहीं, शिवनगर निवासी पवन राठौर और हेमंत राठौर की मौत से भी परिवार और पड़ोसी सदमे में हैं। दोनों दोस्त थे और एक ही फैक्ट्री में काम करते थे। हादसे के बाद घायल पवन ने दर्द में होने के बावजूद फोन कर परिजनों को सूचना दी, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। यह फोन कॉल अब परिवार के लिए आखिरी आवाज बनकर रह गई है।
हादसे के बाद जागी सरकार, आनन-फानन में कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, शीतला माता मंदिर के पास बेकाबू ट्रक ने करीब 45 श्रद्धालुओं को कुचल दिया था। हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आठ घायलों की हालत नाजुक बताई गई है। घटना के बाद फरार ट्रक चालक और मालिक को राजस्थान के धौलपुर से गिरफ्तार किया गया।
हादसे के बाद सरकार हरकत में आई और आनन-फानन में कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबंधित सीएसपी को हटाने के निर्देश दिए, जबकि ड्यूटी पर तैनात आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए हैं, जिसकी रिपोर्ट सात दिन में आने की बात कही गई है।
सुरक्षा में चूक पर उठ रहे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद लोगों में गुस्सा है। सवाल उठ रहे हैं कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या समय रहते जरूरी कदम उठाए जाते तो इतने लोगों की जान बच सकती थी? अब पीड़ित परिवारों को सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कदम उठाए जाने का इंतजार है।

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