भोपाल। प्रदेश में दूध और उससे बने खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान में घी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा लिए गए नमूनों की जांच में भोपाल के 13 और इंदौर के 8 घी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनके अलावा डिंडौरी, उज्जैन, दमोह और धार से लिए गए नमूनों में भी गड़बड़ी मिली है। विभाग ने संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
भोपाल में जांच के दौरान द्वारकेश, शगुन, गोवर्धन, दानेदार, भूमि, धोलपुर फ्रेश और भूमि प्रीमियम प्योर के घी के नमूने असुरक्षित पाए गए। वहीं डिंडौरी में वास्तु और गोपी श्री के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इंदौर से लिए गए 8 नमूनों में श्री सुधा प्रीमियम, गुमार प्योर, शुद्ध घी, गाय का घी और वास्तु एगमार्क देशी घी सहित अन्य नमूने असुरक्षित मिले हैं। उज्जैन के एसआईएमआई मिल्क देशी घी के 2 नमूने भी जांच में असुरक्षित पाए गए। दमोह और धार से लिए गए 1-1 नमूने भी मानक के अनुरूप नहीं मिले।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इन नमूनों की जांच के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों और उत्पादों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट पर रोक लगाने के साथ उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
44 हजार 407 किलो सामग्री जांच के दायरे में
20 जुलाई से 10 अगस्त के बीच चलाए गए अभियान के दौरान प्रदेशभर में दूध और दुग्ध उत्पादों के कुल 2234 नमूने लिए गए। इनमें दूध के 849, मावा के 106, पनीर के 296, घी के 601 और अन्य दुग्ध उत्पादों के 382 नमूने शामिल हैं। जांच के दौरान कुल 44 हजार 407 किलो खाद्य सामग्री कार्रवाई के दायरे में आई। विभाग के अनुसार जब्त या संबंधित कार्रवाई में शामिल सामग्री का अनुमानित मूल्य 2.73 करोड़ रुपए है।
जांच में 73 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। कार्रवाई के दौरान 8 खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। वहीं खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत 38 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें से 1 मामले में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।
अधिकारियों की लापरवाही उजागर
प्रदेशव्यापी अभियान की मंगलवार को आयुक्त एवं नियंत्रक, खाद्य एवं सुरक्षा प्रशासन ने समीक्षा की। समीक्षा के दौरान जिलों में नमूना लेने और कार्रवाई से जुड़े काम की प्रगति की जानकारी ली गई। कुछ अधिकारियों द्वारा सौंपे गए दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की गई। आयुक्त ने मुरैना के खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवनीश गुप्ता, सागर की खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रीति राय और पन्ना के खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश राय को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
इसके साथ ही प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पदस्थ 42 उप संचालक, अभिहित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों से अभियान के दौरान किए गए कार्य और सामने आई कमियों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।