छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का सरकार पर करारा प्रहार, गृह मंत्री से मांगा जवाब!

नई दिल्ली। लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की राजधानी में विद्यार्थियों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई अपनी बात में उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर डंडे बरसाए गए और छर्रे (पैलेट) दागे गए, लेकिन इतने गंभीर वाकये के बावजूद गृह मंत्री ने चुप्पी साध रखी है।

प्रयागराज में पीड़ित युवा से मुलाकात का दर्द
राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक अभ्यर्थी के साथ हुई बातचीत का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सालों से परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र ने हताशा में कहा था कि अब उसके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। उसके परिवार ने पढ़ाई के लिए अपनी भूमि बेच दी और भारी कर्ज़ लिया, परंतु परिणाम शून्य रहा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह असफलता उस अभ्यर्थी की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की है जो युवाओं के अथक परिश्रम का सही मूल्यांकन करने में विफल रही है।

युवाओं को डिजिटल उलझाव में फंसाने का आरोप
प्रयागराज में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि देश की युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया के व्यसन में उलझाया जा रहा है। उनका कहना था कि युवाओं का व्यक्तिगत डेटा बड़ी-बड़ी कंपनियों को सौंपा जा रहा है और उन्हें केवल रील्स देखने या मैसेज भेजने में व्यस्त रखा जा रहा है। उन्होंने इसे आधुनिक समय का नया नशा करार देते हुए कहा कि युवाओं को स्थायी रोजगार देने के बजाय डिलीवरी बॉय या मजदूरी जैसे कामों की तरफ धकेला जा रहा है, जबकि देश के 40 करोड़ युवा ही असली ताकत हैं।

संसदीय गतिरोध और विपक्ष की मांग
प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के विरोध में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कठोर कार्रवाई पर गृह मंत्री का आधिकारिक वक्तव्य न आने से संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बरकरार है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि गृह मंत्री सदन में आकर अपनी बात रखें। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी गृह मंत्री के रवैये की आलोचना करते हुए कहा था कि राज्य सभा के सभापति के निर्देश के बाद भी वे वक्तव्य देने नहीं आए। वहीं दूसरी ओर, सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि किस विषय पर कौन सा मंत्री उत्तर देगा।

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