राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, छात्रों को माफी नहीं, रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा चाहिए!

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एमडीएमके महासचिव वाइको के संसदीय भाषणों के संकलन के विमोचन कार्यक्रम में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्रों, युवाओं, रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, राज्यों के अधिकार और संविधान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने कहा कि देश के छात्र और युवा इस समय गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि युवाओं को माफी की नहीं, बल्कि रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाओं और ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है जो ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करे। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है।

युवाओं के भविष्य को माफ करने का अधिकार किसने दिया
उन्होंने कहा कि छात्र रोजगार की मांग कर रहे हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता चाहते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की अपेक्षा रखते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि दूसरी ओर प्रधानमंत्री छात्रों को ‘माफ’ करने की बात करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के युवाओं के भविष्य को माफ करने का अधिकार प्रधानमंत्री को किसने दिया। उनके अनुसार यह समझ से परे है कि ऐसा अधिकार किसी को कैसे मिल सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा पीड़ा में हैं और उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार को युवाओं की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए, क्योंकि रोजगार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनके भविष्य से सीधे जुड़े विषय हैं।

आरएसएस की सोच के पीछे ऐसा दृष्टिकोण
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों, विशेष रूप से आरएसएस की सोच के पीछे ऐसा दृष्टिकोण है जो भारत की विविधता को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत अनेक भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और सामाजिक विविधताओं वाला देश है तथा यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। इसलिए इस विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए।

इंडिया, दैट इज भारत
संविधान का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि ‘इंडिया, दैट इज भारत, राज्यों का संघ है।’ उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य अपने लोगों के इतिहास, भाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य का नाम केवल एक शब्द नहीं होता, बल्कि उसके साथ वहां के लोगों की पहचान और ऐतिहासिक विरासत जुड़ी होती है।
उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक राज्य को अपनी पहचान और अभिव्यक्ति का अधिकार देता है। इसलिए सभी राज्यों के साथ समान, निष्पक्ष और सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता और संघीय व्यवस्था में निहित है तथा राज्यों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना संविधान और लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप है।

Leave a Comment