दिल्ली में इंदौरी स्वाद की तलाश ने रचा इतिहास, 12 लाख के निवेश से शुरू हुआ ‘पोहा प्लैनेट’, एक साल में कमाए 3.6 करोड़!

नई दिल्ली। इस शहर की गलियों का पोहा सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति और भावनाओं का हिस्सा है। लेकिन, जब इंदौर के रहने वाले चिरायु गोयल पढ़ाई और काम के सिलसिले में दिल्ली पहुंचे, तो उन्हें वहां सब कुछ मिला, सिवाय अपने शहर के उस असली और चटपटे पोहे के। दिल्ली के होटलों और ठेलों पर मिलने वाले पोहे में न तो वह मिठास थी और न इंदौरी जीरावन मसाले की वह खनक। इस स्वाद की कमी ने चिरायु को दुखी करने के बजाय एक अनोखे बिजनेस आइडिया की प्रेरणा दे दी, जिसने आज करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया है।

एक साल की रिसर्च और इंदौर का प्रामाणिक स्वाद
चिरायु गोयल ने समझ लिया था कि दिल्ली-एनसीआर में मध्य प्रदेश के लाखों लोग रहते हैं जो रोज सुबह इस स्वाद के लिए तरसते हैं। इसी जरूरत को भांपते हुए उन्होंने वर्ष 2024 में ‘पोहा प्लैनेट’ की नींव रखी। हालांकि, शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती पोहे के उसी प्रामाणिक स्वाद को दिल्ली में दोहराना था। इसके लिए चिरायु ने करीब एक साल तक रेसिपी पर गहन शोध किया। उन्होंने स्वाद से कोई समझौता न करते हुए तय किया कि पोहा बनाने का विशेष मोटा चावल, असली जीरावन मसाला और बारीक रतलामी/इंदौरी सेव सीधे इंदौर से ही मंगवाई जाएगी। इस तरह पारंपरिक इंदौरी रेसिपी और ताजी सामग्री के दम पर उन्होंने वह स्वाद तैयार किया जो लोगों को सीधे इंदौर की सराफा और छप्पन दुकान की याद दिला दे।

12 लाख के शुरुआती निवेश से 9 क्लाउड किचन का सफर
मात्र 12 लाख रुपये के मामूली शुरुआती निवेश से शुरू हुए ‘पोहा प्लैनेट’ ने बहुत कम समय में खान-पान की दुनिया में अपनी धाक जमा ली। सबसे पहले दिल्ली में डिलीवरी आधारित मॉडल यानी ‘क्लाउड किचन’ से शुरुआत की गई। लोगों को जैसे ही घर बैठे असली इंदौरी पोहे का स्वाद मिलने लगा, इसकी मांग तेजी से बढ़ने लगी। देखते ही देखते पोहा प्लैनेट का दायरा दिल्ली-एनसीआर से बढ़कर दक्षिण भारत के आईटी हब बेंगलुरु तक फैल गया। आज कंपनी के कुल 9 सफल क्लाउड किचन संचालित हो रहे हैं, जहां रोजाना हजारों की संख्या में ऑर्डर प्रोसेस किए जाते हैं।

पहले साल में 3.6 करोड़ कमाई, अब अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर
ब्रांड की गुणवत्ता और ग्राहकों के बेमिसाल प्यार का ही नतीजा है कि अपने संचालन के पहले ही वित्तीय वर्ष में पोहा प्लैनेट ने 3.6 करोड़ रुपये का शानदार रेवेन्यू दर्ज किया है। महज एक स्थानीय नाश्ते को इतने बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप देने की चिरायु की यह पहल अब नए आयाम छूने को तैयार है। आने वाले समय में कंपनी केवल डिलीवरी मॉडल तक सीमित नहीं रहना चाहती। चिरायु का लक्ष्य अब पोहा प्लैनेट के फ्रेंचाइजी मॉडल और डाइन-इन फिजिकल आउटलेट्स (रेस्टोरेंट) खोलने का है। इसके साथ ही, वे इस भारतीय स्वाद को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए दुबई और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने आउटलेट शुरू करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। चिरायु की यह सफलता साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और आइडिया में सच्चाई हो, तो एक साधारण सा पोहा भी करोड़ों के ब्रांड में तब्दील हो सकता है।

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