हैदराबाद से फिल्म की शूटिंग से लौटा था, युवक की जान लेने वाला हाथी, शराब की गंध से हाथी भड़का!

इंदौर। रिक्शा चालक विजय होलकर की मौत के मामले में इंदौर वन मंडल ने हाथी के परिवहन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच तेज कर दी। शुक्रवार को महावत रामजी तथा हाथी के मालिक संदीप निर्मोही नौलखा स्थित इंदौर रेंज कार्यालय पहुंचे और हाथी के पंजीयन, लाइसेंस तथा ट्रांजिट पास सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। जांच में सामने आया कि हाथी को उज्जैन से हैदराबाद फिल्म शूटिंग के लिए ले जाया गया था, लेकिन वापसी के दौरान उसे नांदेड़ से पैदल इंदौर लाया गया। उस दिन की घटना का कारण भी शराब की गंध बताया गया।
इस संबंध में आवश्यक अनुमति के दस्तावेज नहीं मिलने पर वन विभाग महावत और मालिक के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की तैयारी कर रहा है। वन विभाग के अनुसार हाथी का पंजीयन निर्मोही अखाड़ा के नाम पर है, जबकि लाइसेंस संदीप निर्मोही के नाम से जारी किया गया है। प्रस्तुत ट्रांजिट पास उज्जैन से हैदराबाद और हैदराबाद से उज्जैन तक हाथी के परिवहन के लिए जारी किया गया था। इसकी वैधता एक महीने की थी, जो 28 जुलाई को समाप्त हो गई। हालांकि, दस्तावेजों में इंदौर में रुकने या हाथी को पैदल लाने की कोई अनुमति दर्ज नहीं मिली।

हाथी को नांदेड़ से पैदल लाया गया
पूछताछ के दौरान इंदौर रेंजर संगीता ठाकुर, डिप्टी रेंजर कोमल परिहार और वनरक्षक आशीष कुशवाहा को संदीप निर्मोही ने बताया कि हाथी फिल्म की शूटिंग के लिए हैदराबाद ले जाया गया था। वहां से 28 जून को वापसी शुरू हुई, लेकिन नांदेड़ में ट्रक का टायर फट गया। नया टायर लगाने के बाद भी हाथी ट्रक में चढ़ने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद उसे पैदल ले जाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 13 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 24 जुलाई को इंदौर पहुंचे और पंचकुइया स्थित राम गोपाल दास आश्रम में ठहरे।

हाथी को गुड़ खिलाने की कोशिश में घटना
यह पूरा मामला 26 जुलाई को सामने आया था, जब राज नगर क्षेत्र में रिक्शा चालक विजय होलकर हाथी को गुड़ खिलाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान हाथी ने उसे सूंड में लपेटकर जमीन पर पटक दिया और उसके सिर पर पैर रख दिया। गंभीर रूप से घायल विजय होलकर की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। घटना के बाद चंदन नगर थाना पुलिस ने महावत रामजी के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके बाद कलेक्टर ने इंदौर वन मंडल के डीएफओ लाल सुधाकर सिंह को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
पूछताछ के दौरान हेमंत दास ने वन विभाग को बताया कि रिक्शा चालक शराब के नशे में था और बार-बार हाथी को गुड़ खिलाने की जिद कर रहा था। उनका कहना था कि शराब की गंध से हाथी विचलित हो गया था। महावत ने कई बार उसे दूर रहने की सलाह दी, लेकिन वह लगातार हाथी के पास पहुंचता रहा। उन्होंने यह भी बताया कि घायल होने के बाद आश्रम की ओर से विजय होलकर के इलाज की व्यवस्था कराई गई और उपचार व दवाइयों पर लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च किए गए।

हाथी को पैदल लाने की अनुमति नहीं   
रेंजर संगीता ठाकुर ने बताया कि दस्तावेजों की जांच में स्पष्ट हुआ है कि वन विभाग उज्जैन ने हाथी के परिवहन की अनुमति केवल ट्रक के माध्यम से दी थी। नांदेड़ से हाथी को पैदल लाने के संबंध में कोई अनुमति या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इस मामले में अखाड़ा संचालक, महावत और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं तथा कुछ अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे गए हैं।
इंदौर वन मंडल के डीएफओ लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि हाथी से संबंधित पंजीयन, लाइसेंस, ट्रांजिट पास और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल हाथी को सुपुर्दगी पर महावत के पास ही रहने दिया गया। क्योंकि, इंदौर वन मंडल के पास उसे सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। साथ ही दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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