नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के बीच 32 साल पुराना वैवाहिक संबंध अब औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों को तलाक की मंजूरी दे दी। वर्ष 2011 से अलग रह रहे दंपती ने अदालत को बताया कि उन्होंने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने और अपने सभी विवादों का समाधान कर लिया है।
उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी शादी समाप्त करने से इनकार कर दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ को बताया कि दोनों पक्षों ने इसी महीने की शुरुआत में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने के लिए संयुक्त आवेदन प्रस्तुत किया था। उमर अब्दुल्ला और पायल की पहली मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में हुई थी, जहां दोनों कार्यरत थे। बाद में दोनों ने विवाह किया। उनके दो बेटे हैं, जिनके नाम जहीर और जमीर हैं।
आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने का सुझाव दिया था। अदालत ने उम्मीद जताई थी कि दोनों गंभीरता से प्रयास करेंगे और विवाद का समाधान निकालेंगे। सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल ने यह भी कहा था कि पायल तलाक देने के पक्ष में नहीं हैं और उन्होंने 300 करोड़ रुपये की एलिमनी की मांग की है।
क्रूरता के आरोपों को भी अस्पष्ट माना
इस विवाद की शुरुआत कई वर्ष पहले हुई थी। वर्ष 2016 में फैमिली कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वे यह साबित नहीं कर सके कि विवाह पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अदालत ने उनके द्वारा लगाए गए क्रूरता के आरोपों को भी अस्पष्ट और पर्याप्त आधारहीन माना था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने फैमिली कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा। साथ ही हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पायल के लिए प्रति माह 1.5 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने तथा अपने एक बेटे की पढ़ाई के लिए 60,000 रुपये प्रतिमाह खर्च वहन करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अप्रैल 2025 में सर्वोच्च अदालत ने दोनों पक्षों को साथ बैठकर विवाद सुलझाने का निर्देश दिया था। इसके बाद आपसी सहमति बनने पर दोनों ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तलाक की मंजूरी दे दी।