इंदौर। खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय फिल्म कास्टिंग कोऑर्डिनेटर और कलाकार गौरव दवे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी वजह से 4 गंभीर मरीजों को नई जिंदगी मिल गई है। अचानक ब्रेन हेमरेज होने पर गौरव को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेथ घोषित कर दिया। इस दुखद घड़ी में गौरव की बहन वैदही राठी, बहनोई पलकेश राठी और भाई रितिक चावरे ने साहस दिखाते हुए अपने माता-पिता को अंगदान के लिए प्रेरित किया। परिवार की सहमति मिलते ही मुस्कान ग्रुप, अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम ने मिलकर अंगदान की पूरी प्रक्रिया को संपन्न कराया।
गौरव के अंगदान से 4 जिंदगियों को बचा लिया गया। उनका हृदय अहमदाबाद भेजा गया, यकृत का इंदौर में ही प्रत्यारोपण हुआ, जबकि दोनों किडनी चोइथराम अस्पताल के मरीजों में सफलता के साथ प्रत्यारोपित की गईं। गौरव के फेफड़ों को चेन्नई भेजने की भी पूरी तैयारी की जा चुकी थी, लेकिन अंतिम क्षणों में कुछ तकनीकी वजहों से उनका प्रत्यारोपण नहीं किया जा सका।
68वां ग्रीन कॉरिडोर, गार्ड ऑफ ऑनर से दी गई विदाई
अंगों को बिना किसी देरी के अस्पताल और एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने अपोलो अस्पताल से एयरपोर्ट और अपोलो से चोइथराम अस्पताल तक दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए। इस व्यवस्था से अंगों को रिकॉर्ड समय में गंतव्य तक पहुंचाया गया। इंदौर शहर की सेवा संस्कृति के तहत बनाया गया यह 68वां ग्रीन कॉरिडोर था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर गौरव दवे को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। दवे परिवार के इस बड़े निर्णय ने पूरे मध्य प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। यह कदम समाज को संदेश देता है कि अंगदान किसी का अंत नहीं, बल्कि कई जिंदगियों की एक नई शुरुआत है।