जबलपुर। शहर के पास बने बरगी डैम में पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है। इस कारण सिर्फ पानी का संकट ही नहीं दिख रहा, बल्कि चार दशक पुरानी एक भूली-बिसरी कहानी भी लोगों के सामने आ गई। डैम के बैकवाटर इलाके में पानी उतरने के बाद लोहे की एक पुरानी मोटर बोट नजर आने लगी है। यह नाव बरसों से पानी के अंदर दबी हुई थी। अब जैसे ही इसके बाहर आने की खबर फैली, वहां इसे देखने वालों की भारी भीड़ जमा हो गई है। लोग अपने कैमरे से इसकी फोटो खींच रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें बहुत तेजी से शेयर की जा रही हैं।
1986 में डूब गई थी यह मोटर बोट
वहां रहने वाले लोगों ने बताया कि यह मोटर बोट बरगी प्रोजेक्ट के शुरुआती दिनों की है। उस वक्त जब बांध बन रहा था, तब डूब में आने वाले गांवों के लोगों को लाने-ले जाने और बांध के काम के लिए ऐसी ही नावों का इस्तेमाल होता था। ऐसा कहा जाता है कि साल 1986 के आसपास किसी तकनीकी खराबी या हादसे की वजह से यह नाव बैकवाटर में डूब गई थी। अच्छी बात यह रही कि उस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन नाव को फिर कभी बाहर नहीं निकाला जा सका। धीरे-धीरे समय बीतता गया और यह नाव पानी के भीतर ही एक इतिहास बनकर रह गई।
जंग लगने के बाद भी दिख रहा प्रोजेक्ट का नाम
अब, जबकि डैम का पानी काफी कम हो गया, तो नाव का ज्यादातर हिस्सा सतह के ऊपर दिखने लगा है। इतने बरसों तक पानी में डूबे रहने की वजह से लोहे की इस मोटर बोट पर जंग की एक मोटी परत चढ़ गई है। फिर भी, इसका पूरा ढांचा आसानी से पहचाना जा सकता है। खास बात यह है कि नाव पर ‘सुमा रेप्स प्रोजेक्ट जबलपुर’ लिखा हुआ अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। इससे यह पक्का हो जाता है कि यह नाव बरगी प्रोजेक्ट से ही जुड़ी है। बरगी डैम में ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा गया, इसलिए यह पुरानी नाव लोगों के बीच बातचीत का मुख्य विषय बन गई है।
इतिहास की निशानी और जल संकट का संकेत
वहां आ रहे पर्यटक इस नाव को बरगी प्रोजेक्ट के इतिहास की एक बहुत कीमती निशानी मान रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ विशेषज्ञों का कहना है कि डैम का इतना कम जलस्तर भविष्य में जल संरक्षण की एक बहुत बड़ी चुनौती की तरफ इशारा कर रहा है। 40 सालों तक पानी के नीचे रही यह मोटर बोट आज सिर्फ लोहे का एक जंग लगा ढांचा नहीं है, बल्कि यह बरगी प्रोजेक्ट के शुरुआती दिनों की मेहनत और उस समय की कहानी बताने वाली एक मूक गवाह बनकर सबका ध्यान खींच रही है।