नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष अब संसद तक पहुंच गया है। पार्टी के 20 सांसदों ने नेतृत्व से अलग राह चुनते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता देने और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। सांसदों ने अपने पत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की है। इस घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।
पत्र पर दस्तखत करने वाले सांसद
जानकारी के अनुसार, बागी सांसदों ने डॉ काकोली घोष दस्तीदार को अपने समूह का नेता घोषित करने की मांग की है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अरूप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, बापी हल्दर, असित कुमार मल तथा अन्य सांसद शामिल बताए जा रहे हैं।
मीटिंग के बाहर बदला घटनाक्रम
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक में भाग लेकर भाजपा के खिलाफ एकजुटता का संदेश देने का प्रयास कर रहे थे। बताया जाता है कि संभावित असंतोष को रोकने के लिए अभिषेक बनर्जी पहले ही दिल्ली पहुंचे थे। जबकि, बाद में ममता बनर्जी भी राजधानी आईं, लेकिन सांसदों के असंतोष को थामने में सफलता नहीं मिल सकी।
ये हैं टीएमसी के 27 सांसद
तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों में अभिषेक बनर्जी, शताब्दी रॉय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, देव अधिकारी, सजदा अहमद, रचना बनर्जी, प्रतिमा मंडल, महुआ मोइत्रा, जगदीश बसुनिया, सायोनी घोष, माला रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय, बापी हल्दर, प्रो. सौगत राय, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, कल्पित दा सरेन खेरवाल, मिताली बेग, कल्याण बनर्जी, पार्थ भौमिक, असित कुमार मल, शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद, डॉ. शर्मिला सरकार, यूसुफ पठान, अबु ताहेर खान तथा खलीलुर रहमान शामिल हैं।
अलग गुट बनाने की सूचना ममता को दी
अलग गुट बनाने की पहल से पहले सोमवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर असंतुष्ट सांसदों की बैठक हुई। बैठक में राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय भी मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया और तृणमूल कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की। सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि उन्होंने अपने निर्णय की जानकारी ममता बनर्जी को संदेश और ईमेल के माध्यम से दे दी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब विधानसभा में दल के भीतर टूट की चर्चा हो रही है तो यह मान लेना उचित नहीं होगा कि ऐसी स्थिति संसद में उत्पन्न नहीं हो सकती।
ममता की ताकत में कमी आई
पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और सांसदों के अलग गुट बनाने की पहल को ममता बनर्जी के राजनीतिक प्रभाव में कमी के रूप में देखा जा रहा है। पहले विधायकों के बीच मतभेद और अब सांसदों की खुली नाराजगी ने तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। राजनीतिक हलकों में इसकी तुलना उस स्थिति से की जा रही है जिसका सामना महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को दल विभाजन के दौरान करना पड़ा था। संसद और पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम के दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।