ट्विशा मर्डर केस: रसूख, रहस्य और न्याय की लड़ाई के बीच CBI जांच की मांग तेज

भोपाल। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब महज़ घरेलू विवाद नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे प्रशासनिक और कानूनी तंत्र को झकझोर कर रख दिया। नोएडा की एक होनहार एमबीए ग्रेजुएट, पूर्व मिस पुणे प्रतियोगी और योग शिक्षिका ट्विशा ने बड़े अरमानों के साथ भोपाल के एक रसूखदार परिवार में कदम रखा था। लेकिन, शादी के कुछ ही महीनों बाद कटारा हिल्स स्थित ससुराल में उसका शव फंदे से लटकता मिला। इस घटना के बाद से ही दो पक्षों के बीच दावों और प्रतिदावों का दौर जारी है। मृतका के मायके वाले जहां इसे सीधे तौर पर दहेज के लिए की गई हत्या करार दे रहे हैं, वहीं ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश में जुटा है।
मामले की संवेदनशीलता और चौतरफा बढ़ते दबाव को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई से कराने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी सख्त रुख अपनाते हुए मृतका के पति समर्थ सिंह का वकालत करने का अधिकार पत्र तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जिससे वह अब किसी भी न्यायालय में पैरवी नहीं कर सकेगा।

अदालती चौखट पर आत्मसमर्पण का ड्रामा, कानूनी दांवपेंच

इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने की आशंका के बीच मुख्य आरोपी समर्थ सिंह शुक्रवार दोपहर अचानक जबलपुर जिला अदालत में आत्मसमर्पण करने पहुंच गया। उसके वकील मृगेंद्र सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि उनका मुवक्किल अदालत परिसर में मौजूद है। हालांकि, इस आत्मसमर्पण का ट्विशा के परिजनों और उनके कानूनी सलाहकारों ने कड़ा विरोध किया है। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और उनके अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने जिला अदालत पहुंचकर दलील दी कि कानूनन आरोपी जबलपुर में आत्मसमर्पण नहीं कर सकता। चूंकि मामला भोपाल का है, इसलिए उसे या तो भोपाल की संबंधित अदालत में जाना होगा या फिर मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी के सामने आना होगा। इससे पहले पुलिस ने आरोपी पर 30 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित कर रखा था और उसका यात्रा दस्तावेज यानी पासपोर्ट रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।
गौर करने वाली बात यह भी है कि आरोपी की मां, जो खुद एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और भोपाल उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष रही हैं, उन्हें पिछले सप्ताह ही स्थानीय अदालत से जमानत मिल चुकी है, जबकि इस मामले की प्राथमिकी में उनका नाम भी बतौर आरोपी दर्ज है। अब राज्य सरकार ने उनकी इस जमानत को रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

डेटिंग ऐप से शुरू हुआ सफर और दहेज की वेदी पर जिंदगी
दिसंबर 2025 में शुरू हुए इस रिश्ते की पृष्ठभूमि बेहद आधुनिक थी। एक डेटिंग ऐप के जरिए ट्विशा की मुलाकात मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व कानूनी सलाहकार समर्थ सिंह से हुई। यह जान पहचान जल्द ही नजदीकी में बदली और दोनों ने विवाह कर लिया। विवाह के बाद ट्विशा अपने सुनहरे भविष्य के सपने संजोए भोपाल आ गई। लेकिन, मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के तुरंत बाद ही उस पर भारी-भरकम रकम और कीमती सामान लाने का दबाव बनाया जाने लगा।
प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। ट्विशा के गर्भवती होने पर उसका जबरन गर्भपात करा दिया गया और उसके चरित्र पर मनगढ़ंत लांछन लगाए गए। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि ट्विशा को दिमागी रूप से अस्वस्थ साबित करने के लिए उसे धोखे से ओलंजापाइन जैसी गंभीर मानसिक रोगों की दवाइयां दी जा रही थीं। दूसरी तरफ, खुद को बचाने के लिए ससुराल पक्ष ने ट्विशा को नशीली दवाओं का आदी बताने की कोशिश की, जिसे पुलिस जांच ने पूरी तरह खारिज कर दिया है, क्योंकि मृतका के विसरा और रक्त के नमूनों में किसी भी प्रकार के नशीले तत्व की पुष्टि नहीं हुई है।

सीसीटीवी के फुटेज और 46 फोन कॉल ने खोला राज
12 मई को हुई इस मौत के पीछे की कहानी घर में लगे सीसीटीवी कैमरे ने काफी हद तक साफ कर दी। घटना के दिन सुबह 7 बजे के फुटेज में ट्विशा बिल्कुल शांत और सामान्य स्थिति में अकेले छत की तरफ जाती हुई दिखाई देती है। लेकिन, इसके ठीक एक घंटे बाद, यानी सुबह 8.20 पर अचानक सीढ़ियों के पास अफरा-तफरी मच जाती है। समर्थ सिंह अपने दो अन्य साथियों के साथ ट्विशा के अचेत शरीर को नीचे लाता हुआ दिखता है, जहां उसे होश में लाने के लिए कृत्रिम सांस देने का प्रयास किया जाता है।
शक की सुई तब और गहरी हो गई जब यह बात सामने आई कि ट्विशा की मौत के तुरंत बाद उसकी पूर्व न्यायाधीश सास ने किसी रसूखदार व्यक्ति को 46 बार फोन किया था। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह सब सबूतों को नष्ट करने और मामले को दबाने के उद्देश्य से किया गया था। न्याय की इस लड़ाई में टूटे हुए माता-पिता ने अपनी बेटी का

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