शराब कारोबारी को फंसा कर एक करोड़ रुपए मांगे, पांच गिरफ्तार!
इंदौर। एक बार फिर चर्चित हनी ट्रैप कांड ने सनसनी फैला दी है। शहर की अपराध शाखा ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो रसूखदार लोगों को प्रेमजाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम वसूलने का काम कर रहा था। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें सबसे चर्चित नाम श्वेता विजय जैन का है।
श्वेता वही महिला है, जो वर्ष 2019 में सामने आए बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले में भी गिरफ्तार हुई थी और जिसने कई बड़े नेताओं, अधिकारियों तथा कारोबारियों को अपने जाल में फंसाकर ब्लैकमेल किया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस बार गिरोह ने इंदौर के शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को निशाना बनाया। आरोपियों ने पहले कारोबारी को महिला मित्रता और नजदीकियों के माध्यम से अपने प्रभाव में लिया, इसके बाद निजी तस्वीरों और वीडियो का सहारा लेकर उस पर दबाव बनाया जाने लगा।
कारोबारी से व्यवसाय में हिस्सेदारी देने की मांग की जा रही थी। साथ ही एक करोड़ रुपये देने का दबाव भी बनाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कारोबारी से सीधे संपर्क और बातचीत की जिम्मेदारी अलका दीक्षित संभाल रही थी। वहीं श्वेता जैन पूरे घटनाक्रम में प्रमुख भूमिका निभा रही थी। पुलिस ने इस मामले में जितेंद्र, लाखन और जयदीप नामक आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।
वर्ष 2019 का चर्चित मामला
श्वेता जैन का नाम पहली बार वर्ष 2019 में पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आया था। उस समय प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया था। कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के निजी वीडियो बनाकर उनसे रकम वसूलने के आरोप लगे थे। उस मामले में लंबे समय तक जांच चली और कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। इसी दौरान इंदौर के इंजीनियर हरभजन सिंह ने भी शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका वीडियो बनाकर उनसे तीन करोड़ रुपये की मांग की गई। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया था। उसी कार्रवाई में श्वेता जैन समेत कई महिलाएं गिरफ्तार हुई थीं।
जेल में हुई मुलाकात, फिर साजिश
पुलिस सूत्रों के अनुसार, श्वेता जैन और अलका दीक्षित की नजदीकियां जेल के भीतर बढ़ीं। बताया जाता है कि दोनों एक ही बैरक में बंद थीं। अलका दीक्षित के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह अपराध जगत में सक्रिय मानी जाती रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि जेल में रहने के दौरान दोनों के बीच गहरी दोस्ती हुई। वहीं पर कथित तौर पर श्वेता जैन ने अलका दीक्षित को लोगों को जाल में फंसाने और उनसे वसूली करने के तरीके समझाए। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर फिर से नया गिरोह तैयार किया और कारोबारी वर्ग को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
कड़ियां जोड़ने की कोशिश
पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल एक कारोबारी तक सीमित नहीं है और इससे पहले भी कई लोगों को निशाना बनाया जा चुका हो सकता है। पुलिस आरोपियों के मोबाइल, निजी संपर्क और आर्थिक लेन-देन की जानकारी खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इस गिरोह के तार दूसरे शहरों से तो नहीं जुड़े हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या पहले के मामलों में शामिल कुछ लोग फिर से सक्रिय हुए हैं।