राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले पर राहुल गांधी का बड़ा प्रहार

सरकार की चुप्पी और विभागीय विफलता पर खड़े किए गंभीर प्रश्न

    नई दिल्ली। चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET में हुई कथित गड़बड़ी को लेकर सियासत गरमा गई। लोकसभा में विपक्ष के मुख्य नेता राहुल गांधी ने रविवार को नीट-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र लीक होने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अब तक पद से न हटाए जाने को लेकर सरकार की कार्यशैली की कड़े शब्दों में निंदा की।

   विपक्ष के नेता ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा करते हुए पिछले दो प्रयासों की तुलनात्मक समीक्षा की। उन्होंने ध्यान दिलाया कि पिछले वर्षों में भी जब ऐसी विसंगतियां सामने आई थीं, तब परीक्षा को पूरी तरह निरस्त नहीं किया गया था और न ही किसी ने जिम्मेदारी ली थी, बल्कि केवल केंद्रीय जांच दल का गठन कर औपचारिकता पूरी कर ली गई थी। इस बार भी जब प्रश्नपत्र पहले ही बाहर आ जाने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी है, तब भी वही पुरानी प्रक्रिया दोहराई जा रही है और जवाबदेही तय करने से बचा जा रहा है।

शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां
   कांग्रेस नेता ने सीधे देश के प्रधान से जवाब मांगते हुए पूछा कि देश की संवेदनशील परीक्षाओं की गोपनीयता बार-बार क्यों भंग हो रही है। उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि इस संवेदनशील विषय पर शीर्ष नेतृत्व मौन क्यों है। उनके अनुसार, लगातार असफल साबित हो रहे विभागीय प्रमुख को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए था। देश के लाखों परीक्षार्थी और उनके अभिभावक इस अनिश्चितता के माहौल से बेहद परेशान हैं और वे सरकार से ठोस जवाब की उम्मीद कर रहे हैं। परीक्षा प्रणाली की इस कमजोरी का सीधा नुकसान देश के होनहार विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है।

परीक्षा निरस्त, अगले महीने दोबारा परीक्षा
    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने मई महीने की शुरुआत में हुई इस परीक्षा को आधिकारिक रूप से रद्द घोषित कर दिया है। यह निर्णय उन पुख्ता सबूतों के आधार पर लिया गया, जिनसे यह साफ हो गया था कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्न बाहर आ चुके थे। अब इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा की जा रही है।

     इस परीक्षा का दोबारा आयोजन अगले महीने की इक्कीस तारीख को किया जाएगा। अचानक लिए गए इस फैसले के कारण देश भर के लगभग तेईस लाख परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। पिछले सात वर्षों में जब से इस स्वायत्त एजेंसी को परीक्षा संचालन का जिम्मा मिला है, यह पहली बार है जब पूरी परीक्षा को सिरे से खारिज करना पड़ा है। इससे पूर्व केवल कुछ केंद्रों पर अंकों के हेरफेर के कारण सीमित संख्या में छात्रों के लिए दोबारा व्यवस्था की गई थी।

महाराष्ट्र की शिक्षिका की गिरफ्तारी
    इस बीच, केंद्रीय जांच दल ने कार्रवाई करते हुए शनिवार को एक और बड़ी कामयाबी हासिल की। देश की राजधानी से एक महिला शिक्षिका को गिरफ्तार किया गया है, जो महाराष्ट्र के पुणे शहर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में वनस्पति विज्ञान की वरिष्ठ अध्यापिका हैं।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक, जीव विज्ञान के गोपनीय प्रश्नों को बाहर भेजने की मुख्य जिम्मेदारी इसी महिला की थी। बताया जा रहा है कि परीक्षा संचालन प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने उन्हें विषय विशेषज्ञ के तौर पर शामिल किया था। इसी विशेष दर्जे का लाभ उठाकर उन्होंने वनस्पति विज्ञान और जंतु विज्ञान के गोपनीय दस्तावेजों तक अपनी पहुंच बनाई और नियमों का उल्लंघन किया।

युवाओं की मानसिक स्थिति पर चिंता
    विपक्ष ने इस प्रशासनिक विफलता को केवल एक परीक्षा की गड़बड़ी तक सीमित न मानते हुए इसे मानवीय त्रासदी से जोड़ा है। उत्तर प्रदेश में एक युवा परीक्षार्थी द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि देश की जर्जर और भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था का परिणाम है। देश के होनहार युवा अपनी योग्यता या मेहनत से नहीं हार रहे हैं, बल्कि वे उस व्यवस्था से टूट रहे हैं जो पूरी तरह पारदर्शी होने का भरोसा देने में नाकाम रही है।

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