खाने में घुला खतरा, बिहार से गुजरात तक दो घटनाओं ने उठाए बड़े सवाल!

होटल का खाने से तीन जिंदगियां उजड़ीं, कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ!

नई दिल्ली। देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आई दो दर्दनाक घटनाओं ने एक बार फिर बाहर के खाने और पैक्ड फूड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भभुआ (कैमूर) और अहमदाबाद में हुई इन घटनाओं में एक युवक और दो मासूम बच्चियों की जान चली गई, जबकि कई लोग अब भी इलाज के सहारे हैं।

पनीर-मंच्यूरियन बना जानलेवा
कैमूर जिले के भभुआ नगर में एक रेस्टोरेंट से पैक कराया गया पनीर और मंच्यूरियन खाना तीन युवकों के लिए भारी पड़ गया। घर पहुंचकर खाना खाने के करीब एक घंटे बाद ही तीनों की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें उल्टियां होने लगीं। इस घटना में 20 वर्षीय विशाल कुमार तिवारी की मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवकों की हालत इलाज के बाद संभल गई।
परिजनों के मुताबिक, विशाल का छोटा भाई ही रेस्टोरेंट से खाना लेकर आया था और तीनों ने साथ बैठकर भोजन किया था। हालत गंभीर होने पर विशाल को भोर में सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने संबंधित रेस्टोरेंट को बंद करवा दिया है और फोरेंसिक टीम ने मौके से सैंपल लेकर जांच शुरू कर दी है। मृतक के पिता ने फूड प्वाइजनिंग और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। शव का पोस्टमार्टम कराकर विसरा जांच के लिए पटना भेजा गया है, जिससे मौत के असली कारणों का पता चल सके।

अहमदाबाद में डोसा बैटर बना जहर
गुजरात के अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके में एक परिवार के लिए डोसा बैटर घातक साबित हुआ। परिवार के मुखिया विमल प्रजापति एक स्थानीय डेयरी से तैयार बैटर खरीदकर लाए थे, जिससे लगातार दो दिन डोसा बनाया गया। बैटर से बने खाने के सेवन के बाद परिवार के चारों सदस्य विमल, उनकी पत्नी भावना, तीन साल की बेटी मिष्टी और करीब तीन महीने की बच्ची राहा की तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। उल्टियां और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आए।
शुरुआत में थोड़ी राहत मिलने के कारण परिवार ने इसे सामान्य बीमारी समझा, लेकिन जल्द ही हालात गंभीर हो गए। मासूम राहा की मौत घर पर ही हो गई, जबकि तीन साल की मिष्टी को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। माता-पिता अब भी एक निजी अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं। जांच अधिकारी इस पहलू पर भी ध्यान दे रहे हैं कि इतनी छोटी बच्ची कैसे प्रभावित हुई, क्योंकि वह ठोस आहार नहीं लेती थी। आशंका जताई जा रही है कि मां के संक्रमित होने के बाद स्तनपान के जरिए असर बच्ची तक पहुंचा हो सकता है।

जांच में जुटी पुलिस और फोरेंसिक टीम
दूसरी बच्ची की मौत के बाद पुलिस हरकत में आई और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घर और डेयरी दोनों जगहों से नमूने इकट्ठा किए हैं। डेयरी संचालक ने अपनी सफाई में कहा कि उसी बैच का बैटर अन्य ग्राहकों ने भी खरीदा था, लेकिन किसी और ने बीमारी की शिकायत नहीं की। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।

खाने की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इन दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। होटल, रेस्टोरेंट और पैक्ड फूड की गुणवत्ता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इन हादसों के पीछे असली वजह क्या थी।

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