नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 से पहले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में कटौती की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को उम्मीद है कि सरकार तेल की कीमतों पर टैक्स का बोझ कम कर सकती है।

पेट्रोलियम मंत्री का बयान
हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू टैक्स ढांचे पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि आम जनता को राहत देना प्राथमिकता है, जिससे वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
कटौती की उम्मीद क्यों?
कच्चे तेल की स्थिरता: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, जिससे सरकार को टैक्स कम करने का मौका मिल सकता है।
महंगाई पर लगाम: ईंधन सस्ता होने से माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की लागत घटेगी, जिसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों के दाम कम होने पर पड़ेगा।
इंडस्ट्री की मांग: मैन्युफैक्चरिंग लागत घटाने के लिए उद्योग जगत लगातार टैक्स कटौती की मांग कर रहा है।
पिछली राहत
केंद्र सरकार ने आखिरी बार मई 2022 में उत्पाद शुल्क घटाया था (पेट्रोल पर ₹8 और डीजल पर ₹6)। तब से अब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
संभावित प्रभाव
यदि 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कटौती की घोषणा करती हैं, तो ट्रांसपोर्टेशन, राशन और निर्माण सामग्री (सीमेंट-सरिया) की कीमतों में कमी आ सकती है, जिससे सीधे तौर पर आम आदमी की बचत बढ़ेगी।