मध्यप्रदेश की सड़कों पर टोल पार करते ही ई-चालान स्वचालित रूप से जारी होगा
भोपाल। परमिट, बीमा और फिटनेस के बिना चलने वाले वाहनों की पहचान अब टोल बूथ पर की जा सकेगी। मध्य प्रदेश की सड़कों पर यह टोल प्लाजा में लगे कैमरों व फास्ट टैग से संभव होगा। वाहनों की वैधता की पहचान टोल प्लाजा पर ही हो जाएगी। वाहनों के दस्तावेज गड़बड़ मिले तो ई-चालान जारी होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश परिवहन आयुक्त कार्यालय में ई-डिटेक्शन सेल को राष्ट्रीय सूचना केंद्र की ई-डिटेक्शन प्रणाली के माध्यम से ई-चालान जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
पुराने वाहनों की भी पहचान होगी
यह प्रणाली 15 वर्ष से अधिक पुराने उन वाहनों की भी पहचान करेगी, जिनका पंजीयन प्रमाण पत्र समाप्त हो चुका है और समय पर नवीनीकरण नहीं कराया गया है। वाहन स्वामी, परिवहन सेवा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जुर्माना जमा कर सकेंगे। टोल प्लाजा पर गुजरते समय वाहन का कोई दस्तावेज एक्सपायर्ड या अवैध पाया जाता है, तो वाहन को डिफॉल्टर के रूप में चिह्नित कर तुरंत ई-चालान जारी किया जाएगा। यह प्रणाली पहले से ही ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। राजस्थान में भी एनएचएआइ ने इसी तरह के स्मार्ट सिस्टम को कई टोल प्लाजा पर लागू करने की योजना बनाई है।
ई-चालान स्वचालित रूप से जारी होगा
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की ई-डिटेक्शन प्रणाली को प्रदेश में स्थित नेशनल हाइवे तथा स्टेट हाइवे के टोल प्लाजा एवं राज्य शासन के अन्य विभागों के साथ एकीकृत किया जाएगा। इसके बाद इन स्थलों से गुजरने वाले वाहनों की वैधता का सत्यापन ई-डिटेक्शन प्रणाली के माध्यम से स्वतः हो जाएगा। यदि कोई वाहन अवैध, बिना बीमा, बिना फिटनेस, बिना पीयूसी या बिना स्वामित्व के टोल पार करता है, तो उसके खिलाफ स्वचालित रूप से इलेक्ट्रानिक (ई-चालान) जारी किया जाएगा।
जरा गड़बड़ी हुई तो चालान जारी
चालान की कार्रवाई ई-डिटेक्शन सेल से होगी। जैसे ही वाहन के बीमा, फिटनेस, पीयूसी में गड़बड़ी मिली तो ई-चालान फोन, एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से वाहन मालिक को भेजा जाएगा। इसमें उल्लंघन का विवरण, अभिलेख राशि और भुगतान की जानकारी होगी। वाहन मालिक को लाइसेंस के विरुद्ध ऑफलाइन अपील या भुगतान का विकल्प मिलेगा। पहले चरण में परमिट, बीमा और फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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