पश्चिम-मध्य रेल जोन के 6 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा हुआ
जबलपुर। बीता साल पश्चिम-मध्य रेल जोन के लिए कई मायनों में खास रहा। लम्बे अरसे से प्रतीक्षित रायपुर ट्रेन की मांग पूरी हुई, रीवा-पुणे सुपरफास्ट ट्रेन की सौगात भी जोन के खाते में आई। साथ ही रीवा-सीधी-सिंगरौली और सतना-पन्ना-खजुराहो के बीच वर्षों से अधूरी पड़ी रेल परियोजनाओं ने रफ्तार पकड़ी, जिससे क्षेत्र के विकास को नई उम्मीद मिली।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भी सफलता मिली जब सबसे लम्बे कटनी ग्रेड सेपरेटर पर ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। वहीं, इटारसी ग्रेड सेपरेटर की दूसरी लाइन पर भी यातायात प्रारंभ हुआ। ‘अमृत भारत योजना‘ के तहत 6 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा हुआ, जिसमें जबलपुर मंडल के कटनी साउथ और श्रीधाम स्टेशन का स्वरूप पूरी तरह बदला गया। साल भर में 143 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का निर्माण किया गया।
रेलवे स्टेशन के विकास का काम
इस साल नई ट्रेनें शुरू न हो पाना कसक रही। मुख्य स्टेशन के पुनर्विकास योजना में 247 करोड़ रुपए स्वीकृत होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो सका। जबलपुर से पुणे और रीवा- मुंबई ट्रेनों के नियमितीकरण तथा जबलपुर-गोंदिया दोहरीकरण जैसी पुरानी मांगें पूरी नहीं हो सकीं।
पहले से सुरक्षा हुई बेहतर
महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय के मुताबिक, सुरक्षा को बेहतर बनाया जा रहा है। कोटा मंडल ने रेल सुरक्षा में इतिहास रचते हुए देश का पहला कवच 4.0 कॉरिडोर सफलतापूर्वक पूरा किया। 30 जुलाई को पहली बार कवच 4.0 लागू हुआ और 27 अक्टूबर को कोटा-नागदा रेल खंड तक विस्तार के साथ दिल्ली-मुंबई मुख्य मार्ग पर मथुरा से से नागदा तक 549 किमी रेलखंड कवच से सुरक्षित हो गया।
ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में मियाना शन को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया। एलईडी, स्मार्ट सर्किट प्रणाली से 10,000 यूनिट से अधिक वार्षिक बिजली बचत सम्भव हुई। एनजी कंजर्वेशन अवार्ड और सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाने को प्लेटिनम अवार्ड मिला।
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