जबलपुर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। दोनों अधिकारियों पर एक निर्माण कार्य के लगभग 10 लाख रुपये के लंबित भुगतान के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। ईओडब्ल्यू ने दोनों को उनके रामपुर स्थित कार्यालय में रिश्वत की दूसरी किस्त लेते समय ट्रैप कार्रवाई के दौरान पकड़ा। गिरफ्तार अधिकारियों में मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जबलपुर सर्किल में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सिविल) प्रहलाद मर्सकोले और कार्यपालन यंत्री (सिविल) चंद्रशेखर मेहरा शामिल हैं। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7(ए) के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
मामले की शुरुआत जबलपुर निवासी ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी की शिकायत से हुई। उन्होंने ईओडब्ल्यू को बताया कि कटनी जिले की बहोरीबंद तहसील के बचैया गांव में जूनियर इंजीनियर कार्यालय भवन के निर्माण कार्य का लगभग 10 लाख रुपये का भुगतान विभाग से होना था। आरोप है कि भुगतान जारी करने के बदले कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा ने 20 हजार रुपये और अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले ने 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इस तरह दोनों अधिकारियों ने कुल 50 हजार रुपये की मांग की थी।
शिकायत सही मिलने पर बना एक्शन प्लान
शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। जांच में रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता से पहले ही 5 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए जा चुके थे। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने ट्रैप की योजना तैयार की।
पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को दोबारा अधिकारियों के पास भेजा गया। जैसे ही दोनों अधिकारियों ने रिश्वत की दूसरी किस्त स्वीकार की, पहले से मौजूद ईओडब्ल्यू टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले के पास से 10 हजार रुपये और कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा के पास से 15 हजार रुपये बरामद किए गए। इस प्रकार दूसरी किस्त के रूप में दी गई कुल 25 हजार रुपये की राशि जब्त की गई।
कानूनी औपचारिकताएं पूरी हुई
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार, यह रिश्वत की दूसरी किस्त थी। जांच में पहले लिए गए 5 हजार रुपये की भी पुष्टि हुई। जबकि, शेष राशि बाद में देने की बात तय हुई थी। ट्रैप कार्रवाई के बाद टीम ने दोनों अधिकारियों के कार्यालय में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी अपने कब्जे में लिए।