हनीट्रैप की आरोपी रेशू के कानूनी जाल में उलझा पति, मस्कट की नौकरी छूटी, करियर चौपट!

हनीट्रैप की आरोपी रेशू के कानूनी जाल में उलझा पति, मस्कट की नौकरी छूटी, करियर चौपट!


इंदौर। बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में अपराध शाखा द्वारा बंदी बनाई गई रेशू चौधरी के अतीत का एक नया पन्ना खुला है। अब तक संचार माध्यमों और पुलिस की फाइलों में जिसे ‘अभिलाषा’ नाम से जाना जा रहा था, उसका वास्तविक और प्रामाणिक नाम रेशू ही है। दरअसल अभिलाष उसके भाई का नाम है, जो पुलिस विभाग में अनुकंपा के आधार पर कार्यरत है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाई की खाकी वर्दी की धौंस दिखाकर रेशू ने अपने पति और ससुराल के लोगों के खिलाफ एक बड़ा कानूनी मोर्चा खोल दिया था।

दस्तावेजों से प्राप्त विवरण के अनुसार, रायपुर के शिवाजी पार्क विवाह वाटिका में 10 दिसंबर 2018 को रेशू और महेंद्र कुमार चौधरी का विवाह संपन्न हुआ था। विवाह के कुछ समय पश्चात रेशू 20 मार्च 2019 को ओमान के मस्कट शहर के लिए चली गई। परंतु उनके वैवाहिक जीवन की खुशियां अधिक दिनों तक टिक नहीं सकीं। मस्कट में केवल तीन महीने का समय बिताने के बाद वह 14 जून 2019 को भारत वापस आ गई।

सूत्रों का कहना है कि भारत आते ही उसने अपने भाई अभिलाष चौधरी के पद और प्रभाव का लाभ उठाया। किसी भी प्रकार की पारिवारिक समझौता बैठक या परामर्श के बिना ही उसने सीधे 31 अगस्त 2019 को महिला थाना सागर में पति महेंद्र, ससुर प्यारेलाल अहिरवार और सास गीता देवी के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न तथा घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करवा दिया।

पति पर आरोप लगाकर उलझाया
रेशू ने पुलिस को की शिकायत में पति पर अत्यंत गंभीर और चौकाने वाले आरोप मढ़े थे। उसका दावा था कि मस्कट में रहने के दौरान पति महेंद्र ने उस पर अपना धर्म बदलने के लिए अत्यधिक दबाव डाला था। रेशू का यह भी आरोप था कि उसका पति उसे बलपूर्वक मदिरापान कराने का प्रयास करता था और विरोध करने पर रसोई गैस खोलकर उसे जीवित जलाने की धमकी देता था। उसने यह भी लिखवाया कि उसे कमरे में ताला बंद करके प्रताड़ित किया जाता था और मायके से और धन लाने की मांग की जाती थी।

ससुराल वालों के आरोप भी कम नहीं
इसके उलट ससुराल पक्ष ने रेशू पर पलटवार करते हुए उसके सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताया है। ससुर प्यारेलाल का कहना है कि रेशू मस्कट में अत्यंत स्वच्छंद और अनियंत्रित आचरण कर रही थी। वह वहां एक ऐसी जीवनशैली अपना रही थी जो किसी भी साधारण और संस्कारी परिवार के लिए स्वीकार योग्य नहीं हो सकती।
इसी आचरण के बीच वह एक दिन अपने पति महेंद्र को बिना कोई सूचना दिए मस्कट वाले घर से नकदी और आभूषण समेटकर भारत भाग आई। भारत आने के बाद भी वह रायपुर स्थित अपने ससुराल जाने के बजाय सीधे सागर में अपने माता-पिता के घर पहुंच गई। वहां उसने पुलिस को गुमराह करके पूरे ससुराल पक्ष को झूठे मुकदमे में उलझा दिया। ससुर ने रायपुर से सागर पुलिस को भेजी शिकायतों में इन सभी बातों का स्पष्ट उल्लेख किया है।

पति का करियर बर्बाद हुआ
रेशू के इस कानूनी चक्रव्यूह ने उसके पति महेंद्र चौधरी के भविष्य और आजीविका को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ओमान में एक अच्छे पद पर कार्यरत महेंद्र के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने के कारण उनका अनुमति पत्र अटक गया, जिससे वह दोबारा विदेश यात्रा नहीं कर सके। वर्तमान में सागर की कनिष्ठ श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी शिखा चतुर्वेदी की अदालत में यह मुकदमा विचाराधीन है, जहां रेशू के लिए 3000 रुपये प्रति माह का गुजारा भत्ता तय किया गया है। चालू माह में ही इस विवाद की कुछ बेहद महत्वपूर्ण अदालती कार्रवाइयां और सुनवाई होनी तय हैं।
बताया जाता है कि रेशू के ससुर मूल रूप से सागर के ही रहने वाले हैं, जो मध्य प्रदेश के विभाजन के समय छत्तीसगढ़ चले गए थे। सागर के इसी पुराने पारिवारिक परिचय के कारण यह विवाह संबंध तय हुआ था, जो अब कोर्ट कचहरी के चक्करों में तब्दील हो चुका है।

पति पर आरोप लगाकर उलझाया
रेशू ने पुलिस को की शिकायत में पति पर अत्यंत गंभीर और चौकाने वाले आरोप मढ़े थे। उसका दावा था कि मस्कट में रहने के दौरान पति महेंद्र ने उस पर अपना धर्म बदलने के लिए अत्यधिक दबाव डाला था। रेशू का यह भी आरोप था कि उसका पति उसे बलपूर्वक मदिरापान कराने का प्रयास करता था और विरोध करने पर रसोई गैस खोलकर उसे जीवित जलाने की धमकी देता था। उसने यह भी लिखवाया कि उसे कमरे में ताला बंद करके प्रताड़ित किया जाता था और मायके से और धन लाने की मांग की जाती थी।

ससुराल वालों के आरोप भी कम नहीं
इसके उलट ससुराल पक्ष ने रेशू पर पलटवार करते हुए उसके सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताया है। ससुर प्यारेलाल का कहना है कि रेशू मस्कट में अत्यंत स्वच्छंद और अनियंत्रित आचरण कर रही थी। वह वहां एक ऐसी जीवनशैली अपना रही थी जो किसी भी साधारण और संस्कारी परिवार के लिए स्वीकार योग्य नहीं हो सकती।
इसी आचरण के बीच वह एक दिन अपने पति महेंद्र को बिना कोई सूचना दिए मस्कट वाले घर से नकदी और आभूषण समेटकर भारत भाग आई। भारत आने के बाद भी वह रायपुर स्थित अपने ससुराल जाने के बजाय सीधे सागर में अपने माता-पिता के घर पहुंच गई। वहां उसने पुलिस को गुमराह करके पूरे ससुराल पक्ष को झूठे मुकदमे में उलझा दिया। ससुर ने रायपुर से सागर पुलिस को भेजी शिकायतों में इन सभी बातों का स्पष्ट उल्लेख किया है।

पति का करियर बर्बाद हुआ
रेशू के इस कानूनी चक्रव्यूह ने उसके पति महेंद्र चौधरी के भविष्य और आजीविका को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ओमान में एक अच्छे पद पर कार्यरत महेंद्र के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने के कारण उनका अनुमति पत्र अटक गया, जिससे वह दोबारा विदेश यात्रा नहीं कर सके। वर्तमान में सागर की कनिष्ठ श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी शिखा चतुर्वेदी की अदालत में यह मुकदमा विचाराधीन है, जहां रेशू के लिए 3000 रुपये प्रति माह का गुजारा भत्ता तय किया गया है। चालू माह में ही इस विवाद की कुछ बेहद महत्वपूर्ण अदालती कार्रवाइयां और सुनवाई होनी तय हैं।
बताया जाता है कि रेशू के ससुर मूल रूप से सागर के ही रहने वाले हैं, जो मध्य प्रदेश के विभाजन के समय छत्तीसगढ़ चले गए थे। सागर के इसी पुराने पारिवारिक परिचय के कारण यह विवाह संबंध तय हुआ था, जो अब कोर्ट कचहरी के चक्करों में तब्दील हो चुका है।

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