सामान्य से कम बारिश का अनुमान, अल नीनो मजबूत होने से सूखे की आशंका 70% तक
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर मौसम का अनुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने अपने पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव किया है। एजेंसी ने 2026 के मानसून सीजन में बारिश का अनुमान घटाकर दीर्घकालिक औसत यानी एलपीए का 85% कर दिया है। इसके साथ ही सामान्य से कम बारिश और सूखे की स्थिति बनने की आशंका 70% बताई गई है। अल नीनो की स्थिति मजबूत होने और पॉजिटिव आईओडी को लेकर अनिश्चितता को इसके पीछे प्रमुख वजह माना गया है। स्काईमेट ने अप्रैल में मानसून के दौरान बारिश सामान्य से 6% कम यानी एलपीए की 94% रहने का अनुमान जताया था। अब इसमें काफी कमी की गई है। एजेंसी का कहना है कि अल नीनो के मजबूत होने का असर मानसून के बचे हुए समय में दिखाई दे सकता है।
बारिश औसत से 13% कम रही
1 जून से 31 जुलाई के बीच देशभर में बारिश दीर्घकालिक औसत से 13% कम रही। स्काईमेट के अनुसार अगस्त में बारिश एलपीए की 84% और सितंबर में 80% रह सकती है। एजेंसी के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने कहा कि अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार सितंबर की शुरुआत में मौसम का प्रभाव ‘मजबूत’ से बढ़कर ‘बहुत मजबूत’ श्रेणी में पहुंच सकता है। स्काईमेट के बदले अनुमान ने सितंबर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि बारिश में गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा तो मानसून के अंतिम चरण में देश के कई हिस्सों में पानी की उपलब्धता और खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।
मानसून का व्यवहार अनिश्चित
अल नीनो का असर पहले भी भारतीय मानसून पर पड़ चुका है। 2023 में अल नीनो की स्थिति के कारण मानसून का व्यवहार अनिश्चित रहा था। इसका असर 2023-24 के फसल वर्ष में भी दिखाई दिया और भारत के अनाज उत्पादन में 6.1% की कमी दर्ज की गई थी। इससे पहले भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसमी अनुमान में बदलाव किया था। आईएमडी ने बारिश का अनुमान एलपीए के 92% से घटाकर 90% कर दिया था। सरकारी मौसम कार्यालय के अनुसार अगस्त-सितंबर में बारिश एलपीए के 94% से कम रहने की संभावना है।
कमजोर मानसून नई चुनौती
भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए मानसून का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि देश में होने वाली सालाना बारिश का करीब 75 से 80% हिस्सा चार महीने के मानसून सीजन से मिलता है। देश के आधे से अधिक अनाज उत्पादन में मानसून की अहम भूमिका रहती है। धान, कपास, दाल और तिलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के लिए बारिश का समय और उसका क्षेत्रवार वितरण बेहद महत्वपूर्ण है। बारिश कम होने या समय पर नहीं होने से किसानों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सितंबर में कमजोर मानसून की आशंका बढ़ने से कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।