पुणे। महाराष्ट्र के पुणे शहर में आयोजित विशेष छात्र सम्मेलन ‘छात्रों की गूंज’ के दौरान एक नया राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने हिस्सा लिया और मंच से अपने लोकगीत के माध्यम से वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर कड़ा प्रहार किया। लोकगीत ‘का बा’ की वजह से इंटरनेट पर चर्चित रहने वाली नेहा राठौर ने अपने संबोधन और काव्य शैली में सरकार की नीतियों तथा धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति को आड़े हाथों लिया।
गीत में ऐतिहासिक शख्सियतों के नामों का उल्लेख
अपने प्रस्तुत गीत में नेहा सिंह राठौर ने कहा कि यह मुल्क किसी एक की निजी संपत्ति नहीं है। उन्होंने गीत के पंक्तियों में कहा : “अरे तुमसा कोई झूठा और बेईमान नहीं है… किसी एक की बपौती हिंदुस्तान नहीं है।”
आगे गाते हुए उन्होंने भारत के साझा इतिहास और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को रेखांकित करने के लिए स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कई जननायकों और योद्धाओं का स्मरण कराया। उन्होंने अपने गीतों में आबिद हसन, मौलाना अबुल कलाम आजाद, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, अब्दुल हमीद और अशफाक उल्ला खान जैसे स्वाधीनता सेनानियों के योगदान को गिनाया। उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि देश के निर्माण में सभी समुदायों की बराबर की हिस्सेदारी रही है।
राजनैतिक गलियारों में नई सुगबुगाहट
राहुल गांधी के साथ एक ही मंच पर उपस्थित होकर व्यवस्था के विरुद्ध सवाल उठाने के इस कदम ने राजनैतिक पंडितों का ध्यान आकर्षित किया है। सार्वजनिक मंचों पर बेबाक राय रखने वाली लोकगायिका का विपक्षी दल के कार्यक्रम में शामिल होना और तीखी काव्य पंक्तियां प्रस्तुत करना आगामी राजनीतिक रणनीतियों और समीकरणों के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक वृत्त में बहस और चर्चाएं तेज हो गई हैं।