पांच राज्यों में फैला ‘नीट’ पेपर लीक का जाल, नासिक प्रेस से पेपर बाहर आने की आशंका!

जांच की आंच में कई राज्य और संगठित गिरोह का पर्दाफाश!

   नई दिल्ली। नीट प्रश्न पत्र लीक प्रकरण ने अब एक व्यापक अंतरराज्यीय षड्यंत्र का रूप ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि इस धांधली के तार महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान समेत देश के पांच प्रमुख राज्यों से जुड़े हुए हैं। शुरुआती जांच के केंद्र में महाराष्ट्र का नासिक स्थित वह छापाखाना है, जहाँ प्रश्न पत्रों की छपाई होती है। आरोप है कि इसी प्रेस से सुरक्षा चक्र को तोड़कर प्रश्न पत्र बाहर निकाला गया। इस पूरे खेल में शुभम नामक व्यक्ति की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है, जिसने मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित एक शिक्षण संस्थान में दाखिला तो लिया था, परंतु वह कभी वहां पढ़ने नहीं पहुंचा। माना जा रहा है कि उसने प्रश्न पत्र को अनुमानित सवालों के पर्चे के रूप में तैयार कर ऊंचे दामों पर बेचने का काम किया।

सीहोर से गुरुग्राम और फिर देशभर में फैला मायाजाल
जांच के सूत्रों के मुताबिक, शुभम के पास से निकला यह विवादित पर्चा हरियाणा के गुरुग्राम में सक्रिय एक प्रभावशाली गिरोह तक पहुंचा। इसी केंद्र से इसे देश के विभिन्न हिस्सों में भेजने की योजना बनाई गई। इस गिरोह ने तकनीक का सहारा लेकर छात्रों को अपने जाल में फंसाया। मोबाइल संदेशों और गुप्त समूहों के माध्यम से इसे छात्रों के बीच साझा किया गया। इन समूहों में यह दावा किया गया कि यही प्रश्न मुख्य परीक्षा में पूछे जाएंगे। गुरुग्राम के इसी नेटवर्क के जरिए यह पर्चा राजस्थान के जमवारामगढ़ इलाके में मांगीलाल और दिनेश नाम के व्यक्तियों तक पहुंचा, जिन्होंने इसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

लाखों का लेनदेन और दक्षिण भारत तक पहुंच
इस काले कारोबार में भारी भरकम राशि के लेनदेन की बात भी सामने आई है। जांच में पाया गया कि कई छात्रों ने इसे प्राप्त करने के लिए लगभग तीस लाख रुपये तक का भुगतान किया। यह पर्चा केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केरल में शिक्षा ग्रहण कर रहे एक छात्र के जरिए यह पुनः राजस्थान के सीकर जैसे शहरों में फैला। हालांकि जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान इस गड़बड़ी का उद्गम स्थल नहीं था, बल्कि प्रश्न पत्र महाराष्ट्र और हरियाणा की कड़ियों से होता हुआ यहां पहुंचा था।

डिजिटल साक्ष्यों से खुलेगी पूरी साजिश
वर्तमान में जांच एजेंसियां बैंक खातों के विवरण, मोबाइल संदेशों के आदान-प्रदान और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संदिग्धों के संपर्कों की सूक्ष्मता से पड़ताल कर रही हैं। यह मामला एक अत्यंत सुव्यवस्थित और संगठित अंतरराज्यीय अपराध की ओर संकेत कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे कड़ियां जुड़ेंगी, इस षड्यंत्र के पीछे छिपे बड़े चेहरों के नाम सामने आएंगे। आने वाले दिनों में कुछ और प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारी और नए तथ्यों के उजागर होने की पूरी संभावना है।

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