नई दिल्ली। अभिनेत्री और मंडी लोकसभा से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने पार्टी से अपने रिश्ते और राजनीतिक भविष्य को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने साफ कहा कि वह भाजपा की कठपुतली नहीं हैं। उनका कहना है कि आज पार्टी उनके साथ है, लेकिन जरूरी नहीं कि कल भी साथ रहे। हालांकि, उन्होंने पार्टी छोड़ने की किसी योजना से इनकार किया और कहा कि भाजपा से उनका जुड़ाव कायम है।
दूरदर्शन को दिए साक्षात्कार में कंगना ने कहा कि वह जानबूझकर पार्टी की विचारधारा से अलग बोलने की कोशिश नहीं करतीं। लेकिन जब किसी मुद्दे पर बहुत शोर होता है तो अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए मजबूती से बोलना जरूरी हो जाता है। उन्होंने माना कि उनके कुछ बयान पार्टी की राय से अलग नजर आए होंगे, लेकिन ऐसा करना उनका उद्देश्य नहीं रहा।
कंगना ने कहा कि उनकी अपनी सोच और आवाज है। वह करीब 2 साल से सांसद हैं, जबकि फिल्मों में उनकी पहचान लगभग 20 साल पुरानी है। इसलिए उनकी पहचान केवल सांसद के पद तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि राजनीति में वह अभी सीख रही हैं और उनके कुछ बयानों से पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा हो सकता है।
मंडी से टिकट कटने का डर नहीं
अगले लोकसभा चुनाव में मंडी से टिकट नहीं मिलने की आशंका पर कंगना ने कहा कि उन्हें इसका डर नहीं है। उनके मुताबिक अब वह केवल अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में नहीं सोचतीं, बल्कि समाज और दूसरे लोगों से जुड़े मुद्दों को भी महत्व देती हैं। उनका कहना है कि चुनावी राजनीति में आगे क्या होगा, यह तय नहीं है, लेकिन इससे उनकी पहचान खत्म नहीं होगी। कंगना ने खुद को अभिनेत्री के साथ फिल्म निर्माता और लेखिका भी बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने काम से लगाव है और जीवन में अभी बहुत कुछ करना बाकी है।
फिल्मों से पूरी तरह नहीं टूटा नाता
राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद कंगना ने फिल्मों की दुनिया से अपना रिश्ता खत्म नहीं किया है। उन्होंने बताया कि आज भी कई निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेना चाहते हैं। कुछ निर्देशक उनसे यह तक पूछते हैं कि उन्होंने फिल्म उद्योग से दूरी क्यों बना ली। कंगना के अनुसार वह अब भी कई निर्देशकों की पसंदीदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बड़े निर्माण संस्थानों से मिले कई प्रस्ताव वह पहले ही ठुकरा चुकी हैं। पुरस्कार समारोहों से दूरी बनाने का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक दौर में उन्हें एक दिन में करीब 100 फोन तक आते थे। उनका दावा है कि उनकी फिल्मों में अभिनय को लेकर इतना दबाव रहता था कि पुरस्कार न मिलने पर आयोजकों को सवालों का सामना करना पड़ता था। कंगना के मुताबिक कुछ प्रकाशन संस्थानों के बड़े अधिकारी उनके घर तक पहुंचे और पुरस्कार समारोहों में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने यहां तक दावा किया कि कुछ लोगों ने उनसे कहा था कि उनके समारोह में नहीं आने पर संबंधित अधिकारियों की नौकरी तक खतरे में पड़ सकती है।
उम्र के मुताबिक भूमिकाओं को तरजीह
कंगना ने अपने भविष्य के फिल्मी सफर को लेकर कहा कि वह अब उम्र और व्यक्तित्व के अनुरूप भूमिकाएं करना पसंद करेंगी। उन्होंने ‘थलाइवी’ में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता का किरदार निभाने का उदाहरण दिया। उनका मानना है कि ऐसे गंभीर और दमदार किरदार उनके लिए ज्यादा उपयुक्त हैं। उन्होंने संकेत दिया कि किसी खान या कुमार के साथ पारंपरिक नायिका की भूमिका करने के बजाय वह ऐसे किरदार चुनना चाहेंगी, जिनसे उनकी अलग पहचान कायम रहे।
कंगना के बयान से साफ है कि वह फिलहाल भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखना चाहती हैं, लेकिन अपनी स्वतंत्र पहचान और विचारों को भी बनाए रखना चाहती हैं। साथ ही, उन्होंने फिल्मों में लौटने की संभावनाओं को भी पूरी तरह बंद नहीं किया है। राजनीति और सिनेमा दोनों में अपनी जगह बनाए रखने की उनकी कोशिश आने वाले समय में किस दिशा में जाती है, इस पर अब सबकी नजर रहेगी।