नई दिल्ली। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। या रिपोर्ट देश में ई20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच आई। एक ओर सरकार ई20 पेट्रोल को पूरी तरह सुरक्षित बता रही है, वहीं दूसरी ओर कई वाहन मालिक इसके कारण इंजन में परेशानी आने का दावा कर रहे हैं। ऐसे माहौल में एआरएआई की रिपोर्ट में ई20 को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ई10 (10% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल के लिए तैयार किए गए वाहनों में यदि ई20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जाता है तो फ्यूल सिस्टम के रबर से बने हिस्सों पर असर पड़ सकता है। परीक्षण के दौरान होज, गैस्केट, सील और ओ-रिंग जैसे पुर्जों में खराबी देखी गई, जिन्हें बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों के बीच इसे महत्वपूर्ण तकनीकी दस्तावेज माना गया है।
एस-IV और बीएस-VI इंजन पर परीक्षण
रिपोर्ट में बीएस-IV और बीएस-VI इंजन पर किए गए परीक्षणों का भी उल्लेख है। ई10 वाहनों पर ई20 के प्रभाव की जांच के दौरान बीएस-IV इंजन का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया, लेकिन बीएस-VI टर्बोचार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद तकनीकी समस्या सामने आई। इंजन ड्यूरेबिलिटी परीक्षण में शामिल दो चारपहिया वाहन निर्माता कंपनियों के परिणाम भी अलग-अलग रहे। एक कंपनी के इंजन ने ई20 ईंधन के साथ 400 घंटे तक बिना किसी परेशानी के काम किया, जबकि दूसरी कंपनी के इंजन में कुल 809 घंटे की टेस्टिंग के दौरान एग्जॉस्ट वाल्व में थर्मो मैकेनिकल फेल्योर दर्ज किया गया।
थर्मोमैकेनिकल फेल्योर का जिक्र
विशेषज्ञों के अनुसार, थर्मो मैकेनिकल फेल्योर तब होता है जब अत्यधिक तापमान और लगातार होने वाली मैकेनिकल गतिविधियों के संयुक्त प्रभाव से इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व टेढ़ा हो जाता है, उसमें दरार आ जाती है या वह टूट सकता है। जानकार यह भी मानते हैं कि ऐसी समस्या के पीछे अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं। वाहन परीक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर इंजन की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग लगभग 2,000 घंटे तक की जाती है।
दोपहिया वाहनों में गंभीर समस्या नहीं
हालांकि रिपोर्ट में दोपहिया वाहनों को लेकर राहत भरी जानकारी भी सामने आई है। तीन प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा किए गए परीक्षणों में ई20 ईंधन के कारण किसी गंभीर तकनीकी समस्या का पता नहीं चला। इन वाहनों के इंजन का प्रदर्शन सामान्य रहा। अध्ययन में यह भी पाया गया कि ई20 पेट्रोल का गाड़ियों के धातु से बने पुर्जों या वाहन की बॉडी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। इसके अलावा ई10 के अनुरूप तैयार किए गए वाहनों में ई20 के इस्तेमाल के बाद टेल पाइप से निकलने वाला उत्सर्जन भी निर्धारित कानूनी सीमा के भीतर ही रहा।
ईंधन की खपत का उल्लेख
रिपोर्ट में ईंधन दक्षता को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। अध्ययन के अनुसार, ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ई10 की तुलना में ईंधन की खपत लगभग 2% से 6% तक बढ़ सकती है। इसका सीधा असर वाहन के माइलेज पर पड़ सकता है। यह प्रभाव वाहन के मॉडल और तकनीक के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।