
अमरकंटक। नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के संरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश सरकार अब और सख्त रुख में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अमरकंटक क्षेत्र में नए निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यहां ‘नो कंस्ट्रक्शन’ और ‘नो मूवमेंट’ जोन का दायरा बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है, ताकि उद्गम स्थल को स्थायी रूप से सुरक्षित रखा जा सके।
अमरकंटक दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने साधु-संतों, जनप्रतिनिधियों और नर्मदा संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं, जिनमें नर्मदा समग्र मिशन भी शामिल है, के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सुझावों को सूचीबद्ध कर उनका परीक्षण कराया जाए, जिससे ठोस निर्णय लिए जा सकें।
इससे अवैध उत्खनन और बेतरतीब विकास रुकेगा
नर्मदा नदी के सामने लंबे समय से अवैध उत्खनन और अव्यवस्थित विकास बड़ी चुनौती बने हुए हैं। उद्गम स्थल भी इन समस्याओं से अछूता नहीं रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पहले भी भोपाल स्थित सुशासन संस्थान में अधिकारियों और संबंधित संगठनों के साथ विस्तृत बैठक कर चुके हैं।
अनियंत्रित निर्माण पर लगेगी रोक
अमरकंटक में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि क्षेत्र में कंक्रीट और सीमेंट के अनियंत्रित उपयोग पर रोक लगाई जाए। वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल और नर्मदे हर सेवा न्यास के अध्यक्ष रामलाल रौतेल समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद रहे। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने बताया कि अमरकंटक क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पहले ही कराया जा चुका है। यदि कहीं अवैध निर्माण मिलता है तो प्रशासन तत्काल कार्रवाई करता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अमरकंटक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, नगर परिषद और मंदिर विकास से जुड़े कार्यों की निगरानी के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है।
पर्यावरण और परंपरा दोनों पर फोकस
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अमरकंटक के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रजातियों जैसे साल, महुआ, आंवला, चार, हर्रा और गुलबकावली के पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाए। वन औषधियों को भी प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा उद्गम स्थल पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ नियमित कार्रवाई, प्लास्टिक और शराब के उपयोग पर सख्ती, तथा धार्मिक और पर्यटन महत्व को ध्यान में रखते हुए संतुलित विकास सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की तैयारी
सरकार अमरकंटक के संवेदनशील हिस्सों को ‘नो मूवमेंट’ और ‘नो कंस्ट्रक्शन’ जोन घोषित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बैठक में ट्रैकिंग मार्गों की व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा, वन उत्पादों के प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी जैसे विषयों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई। साथ ही मंदिरों, तालाबों और घाटों के संरक्षण और सुव्यवस्थित रखरखाव को भी प्राथमिकता में रखा गया है।