हरदा की बेटी का जलवा: विदेशी फूल से बनाया देसी एनर्जी ड्रिंक, अब दुबई के बाज़ारों में धूम :

हरदा की बेटी का जलवा: विदेशी फूल से बनाया देसी एनर्जी ड्रिंक, अब दुबई के बाज़ारों में धूम  :

हरदा की बेटी का जलवा: एक छोटे से गाँव सिरकम्बा की अर्चना नागर धाकड़ ने खेती और व्यापार के मेल से कामयाबी की नई इबारत लिखी है। अर्चना ने दक्षिण अफ्रीका के खास फूल ‘हिबिस्कस सबदरिफा’ (रोजेले) को हरदा के खेतों में उगाकर दिखाया और इससे ‘बरगंडी बाग’ नाम का एकनैचुरल एनर्जी ड्रिंक तैयार किया है। ​हार न मानने का जज़्बा ​अर्चना की यह यात्रा साल 2016 में शुरू हुई थी। उन्हें एक ऑस्ट्रेलियाई किसान समूह ने इस फूल की खेती की सलाह दी थी। विदेशी बीज को मध्य प्रदेश की आबोहवा में ढालना कोई आसान काम नहीं था; अर्चना को शुरुआती दो सालों तक नाकामी का मुँह देखना पड़ा।

लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी माँ निर्मला के साथ मिलकर खेती के नए तरीके आज़माए और लंबी मेहनत के बाद उन्हें कामयाबी मिली। आज वे 20 एकड़ में इसकी खेती कर रही हैं। ​गाँव की पहचान पहुँची दुबई तक ​अर्चना का यह ड्रिंक पूरी तरह शुद्ध है और इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

विटामिन-सी से भरपूर यह ड्रिंक सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसकी बढ़िया क्वालिटी की वजह से भारत सरकार की संस्था APEDA ने इसे निर्यात की मंजूरी दी। हाल ही में, 26 से 30 जनवरी 2026 को दुबई में हुई ‘गल्फूड 2026’ प्रदर्शनी में भारत सरकार ने इस ड्रिंक को ग्लोबल मार्केट में उतारा। इसकी पैकेजिंग पर खास तौर से सिरकम्बा गाँव का नक्शा छापा गया है।

साथ ही, अरबी, फ्रेंच और अंग्रेजी में जानकारी दी गई है ताकि दुनिया भर के लोग इसे आसानी से समझ सकें। ​महिलाओं को मिला काम और बढ़ा कारोबार ​कमाई: 15 लाख रुपये से शुरू हुआ यह सफर आज 30 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुँच गया है।

​रोज़गार: अर्चना ने करीब 200 आदिवासी महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है। ये महिलाएँ फूल तोड़ने से लेकर पैकिंग तक की ज़िम्मेदारी संभालती हैं। ​नई शुरुआत: झुंडगांव में उनकी एक नई फैक्ट्री का काम भी तेज़ी से चल रहा है। ​परिवार का साथ और पक्का इरादा ​पॉलीटेक्निक और कॉमर्स की पढ़ाई करने वाली अर्चना एक शिक्षित परिवार से हैं।

उनके पिता को इलाके में ‘टमाटर किंग‘ कहा जाता है। अर्चना अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार और सरकार की योजनाओं को देती हैं। उनकी कहानी बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो गाँव के खेतों से निकलकर भी सात समंदर पार अपनी पहचान बनाई जा सकती है।

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