विवादित बयान मामले में मंत्री विजय शाह पर नहीं चलेगा मुकदमा, कैबिनेट का फैसला, राज्यपाल को भेजा प्रस्ताव

​भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में कैबिनेट की बैठक में एक अहम फैसला लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मंजूरी न देने का निर्णय किया है। खास बात यह रही कि जब इस संवेदनशील मुद्दे पर मंथन चल रहा था, तब खुद मंत्री विजय शाह भी बैठक कक्ष में उपस्थित थे।
​ ​बैठक में अभियोजन की अनुमति न देने के पीछे यह आधार बताया गया कि मंत्री शाह इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई बार सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर चुके हैं। हालांकि, सरकार ने इस निर्णय की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। उल्टे बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते समय मंत्री राकेश सिंह ने ऐसे किसी विषय पर बातचीत होने से साफ इनकार कर दिया।
​मंगलवार को जब इस विषय पर चर्चा शुरू हुई, तब कमरे में मौजूद तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को बाहर भेज दिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला और विधि विभाग के सचिव की मौजूदगी में इस पर अंतिम मुहर लगाई गई।

​22 बार खेद जताया, राज्यपाल को भेजी गई फाइल
​मंत्रिमंडल की बैठक में यह बात भी सामने आई कि विवादित टिप्पणी के बाद से विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट आने तक मंत्री शाह कुल 22 बार माफी मांग चुके हैं, जिसमें से 4 बार उन्होंने खुले मंचों से क्षमा याचना की है। कैबिनेट में सहमति बनने के बाद अब अंतिम निर्णय के लिए इस प्रस्ताव को राजभवन भेज दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस औपचारिक बैठक की शुरुआत पारंपरिक रूप से वंदे मातरम के गायन से हुई थी।

​न्यायालय बदल सकता है निर्णय
​सरकार के इस कदम पर वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की प्रतिक्रिया आई है। उनका कहना है कि यदि अदालत चाहे तो सरकार के इस निर्णय को निरस्त या परिवर्तित कर सकती है। हालांकि, आगामी सुनवाई में ही यह साफ हो पाएगा कि राज्य सरकार ने किस तर्क के आधार पर मंजूरी देने से मना किया है और वहां क्या दस्तावेज पेश किए जाते हैं।

​सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को महत्वपूर्ण सुनवाई
​मंत्री शाह पर मुकदमा चलाने का विषय लंबे समय से अटका हुआ था। मामले की पड़ताल कर रही एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिताकी धारा 196(1)(ए) के तहत उन पर केस चलाने की इजाजत मांगी थी। 19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में यह बात उजागर हुई थी कि जांच दल अपनी रिपोर्ट पूरी कर चुका है, लेकिन मंजूरी का मामला शासन के पास अटका है। तब अदालत ने सरकार को निर्णय के लिए 2 हफ्ते की मोहलत देते हुए टिप्पणी की थी कि माफी मांगने में बहुत देर कर दी गई है।
​इसके बाद मई में शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को पुराने निर्देशों का पालन करते हुए 4 सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद 23 जुलाई की अदालती रिपोर्ट से पता चला कि सरकार की ओर से कोई कागजात जमा नहीं किए गए। अब 31 अगस्त को होने वाली सुनवाई से पहले सरकार को शपथ पत्र (एफिडेविट) दाखिल कर अपना पक्ष रखना होगा।

​महू के कार्यक्रम में बिगड़े थे बोल
​यह पूरा विवाद 11 मई 2025 का है, जब जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह ने इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम में भाषण दिया था। वहां उन्होंने भारतीय थल सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था, जिसके बाद से ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठ रही थी।

Leave a Comment