राम मंदिर चढ़ावा चोरी : एसआईटी ने ट्रस्टियों की संपत्तियों के दस्तावेज खंगाले, अविनाश शुक्ल से लंबी पूछताछ !

अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने करीब 8 घंटे तक विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की। जांच के दौरान ट्रस्ट की ओर से भूमि खरीद के लिए विभिन्न बैंकों के माध्यम से किए गए वित्तीय लेन-देन का सत्यापन किया गया। टीम ने नकदी गणना से जुड़े बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की और पिछले कुछ वर्षों के आंतरिक ऑडिट रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
जांच के दौरान मंदिर ट्रस्ट से जुड़े तीन प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव की संपत्तियों से संबंधित विवरण भी खंगाले गए। दिनभर जांच के बाद शाम करीब 7 बजे एसआईटी की टीम लखनऊ लौट गई। पुलिस ने विवेचक एवं क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष त्रिपाठी के निर्देशन में आरोपी अविनाश शुक्ल को कस्टडी रिमांड पर लेकर उससे गहन पूछताछ की। पुलिस उसे उसके कमरे और उसके बताए गए अन्य स्थानों पर भी लेकर गई। इस दौरान एक ब्रीजा कार सहित कुछ संपत्तियों की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने कार को जब्त कर लिया।

जांच अवधि 15 जुलाई तक बढ़ाई
राज्य सरकार द्वारा एसआईटी की जांच अवधि 15 जुलाई तक बढ़ाए जाने के बाद गुरुवार दोपहर लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव वित्त नीलरतन कुमार की टीम दोबारा अयोध्या पहुंची थी। अधिकारियों ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और भूमि खरीद से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ की थी। इसी दौरान उनसे उनकी चल-अचल संपत्तियों का विवरण भी मांगा गया था।
शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे एसआईटी की टीम रामजन्मभूमि परिसर पहुंची और विभिन्न बैंकों के अधिकारियों को बुलाकर भूमि खरीद के भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का मिलान किया। साथ ही स्टेट बैंक के उन कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई, जो मंदिर में चढ़ावे की नकदी की गणना में शामिल रहे थे। उनसे नकदी गिनने और जमा करने की प्रक्रिया से जुड़ी कई जानकारियां ली गईं।

सुरक्षाकर्मी भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान कुछ सुरक्षाकर्मी भी एसआईटी के दायरे में आए हैं। जानकारी के अनुसार व्हील चेयर सेवा से जुड़े तीन राइडर और दर्शन सेल के कुछ सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इनमें से एक राइडर द्वारा आरोपी अविनाश शुक्ल से वाहन खरीदने के लिए 2 लाख रुपए लेने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि ये लोग नकदी गणना करने वाले कर्मचारियों के लिए कैरियर की भूमिका निभाते थे। अयोध्या में इनसे जुड़ी कुछ संपत्तियों का भी पता चला है।

अनियमितताओं के दस्तावेज कब्जे में
एसआईटी ने पुराने ऑडिट रिकॉर्ड की जांच के दौरान कुछ अनियमितताओं के संकेत मिलने पर संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। जिन दो बैंक कर्मचारियों के नाम शुरू से इस मामले में सामने आ रहे थे, उनसे भी विस्तृत पूछताछ की गई। इसके अलावा कुछ अन्य बैंक अधिकारियों से भी जानकारी ली गई। जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, जिससे बैंक की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

सुनसान स्थान पर राशि का बंटवारा
जांच दल ने मंदिर में आभूषणों के रखरखाव से जुड़े एक ट्रस्ट कर्मचारी से भी पूछताछ की। वहीं पुलिस टीम करीब 9 बजे अविनाश शुक्ल को रिमांड पर लेकर सबसे पहले पुलिस लाइन पहुंची, जहां उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद उससे पूछताछ करते हुए पुलिस उसे लखनऊ हाईवे स्थित जनौरा कट के पास एक बाग में ले गई। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि इस सुनसान स्थान पर कभी-कभी कथित रूप से रकम का बंटवारा किया जाता था।
इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे पुलिस अविनाश को कौशलपुरी स्थित उस योग केंद्र लेकर पहुंची, जहां वह अपने भाई अभिषेक शुक्ल के साथ रहता था। यहां करीब आधे घंटे तक कमरों की तलाशी ली गई। पुलिस ने एक प्लॉट का भी निरीक्षण किया, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वह अविनाश शुक्ल से जुड़ा है।

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