महाराष्ट्र में टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य, नियम न मानने पर लाइसेंस होगा रद्द, एक महीने के नोटिस के बाद होगी सख्त कार्रवाई!

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रॉनिक मीटर से चलने वाली टैक्सियों के चालकों और परमिट धारकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने इसके लिए महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (थर्ड अमेंडमेंट) रूल्स 2026 जारी करते हुए महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स नियम 1989 में संशोधन किया है।
नए नियमों के अनुसार नियम 4 में ‘पूर्ववृत्त’ शब्द के बाद ‘और मराठी भाषा का कार्यसाधक ज्ञान’ जोड़ा गया है। इसके साथ ही नियम 22 का हाशिया बदलकर ‘इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगी मोटर कैब के चालकों के लिए अतिरिक्त नियम’ कर दिया गया है।

मराठी नहीं आने वालों को एक महीने का नोटिस
सब्सक्राइबर्स और अधिकृत चालकों के लिए सबसे प्रमुख बदलाव नियम 24 में किया गया। इसके तहत अब हर टैक्सी चालक को मराठी का ज्ञान होना अनिवार्य होगा। यदि किसी चालक को मराठी नहीं आती है, तो लाइसेंसिंग अथॉरिटी उसे 1 महीने का नोटिस जारी करेगी। इस 1 महीने के भीतर चालक को मराठी सीखनी होगी। यदि तय समय सीमा में नियम का पालन नहीं होता है, तो प्राधिकरण लिखित कारण दर्ज कर चालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है। कार्रवाई के पहले चरण में ड्राइविंग लाइसेंस पर अधिकृतता को 3 महीने तक निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी नियम का पालन न होने पर सुनवाई का मौका देकर चालक का अधिकृत परमिट पूरी तरह रद्द किया जा सकता है।

टैक्सी परमिट के नवीनीकरण के लिए भी मराठी ज्ञान जरूरी
सरकार ने इसके अलावा नियम 78 और नियम 85 में भी संशोधन किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब टैक्सी परमिट के नवीनीकरण के लिए भी मराठी भाषा का ज्ञान होना जरूरी होगा। प्राधिकरण के संतुष्ट होने के बाद ही इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली टैक्सी का परमिट रिन्यू किया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि इस निर्णय से यात्रियों और चालकों के बीच संवाद आसान होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।
केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-ए (आरपीआई-ए) के प्रमुख रामदास आठवले ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, जहां देश के हर कोने से लोग रोजगार की तलाश में आते हैं। यहां फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ बड़े उद्योग भी हैं। ऐसे में भाषा को लेकर विवाद खड़ा करना सही नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले सभी लोगों को मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन भाषा न जानने पर तुरंत कार्रवाई करना उचित नहीं है।

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