हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी राहत, बार काउंसिल चुनाव के बाद अभ्यावेदन देने की मिली अनुमति
जबलपुर। मध्य प्रदेश में लंबे समय से वकालत कर रहे अधिवक्ताओं के लिए पेंशन, बीमा और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाएं शुरू करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका का हाई कोर्ट ने निराकरण कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव संपन्न होने के बाद वह अपनी मांगों को लेकर बार काउंसिल के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता संबंधित मांगों को बार काउंसिल के सामने रख सकता है। यदि अभ्यावेदन पर अनुकूल निर्णय नहीं लिया जाता है, तो याचिकाकर्ता कानून के तहत उसे चुनौती देने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
35 से 40 साल वकालत करने वालों के लिए योजना की मांग
जिला बार एसोसिएशन, शहडोल के अध्यक्ष अधिवक्ता राकेश सिंह बघेल ने जनहित याचिका दायर कर लंबे समय से वकालत कर रहे अधिवक्ताओं के लिए व्यापक कल्याणकारी योजना लागू करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता योगेश सिंह बघेल ने पक्ष रखा।
याचिका में कहा गया कि 35 से 40 वर्षों तक न्यायिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं देने वाले अधिवक्ताओं के लिए जीवन के इस पड़ाव पर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की ठोस व्यवस्था होना जरूरी है। इसी तरह शुरुआती दौर में संघर्ष कर रहे जूनियर अधिवक्ताओं को भी आर्थिक सहायता मिलने से वे बेहतर तरीके से अपने पेशे में आगे बढ़ सकेंगे।
बिहार की योजना का दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने अपनी मांग के समर्थन में बिहार स्टेट बार काउंसिल एडवोकेट्स वेलफेयर स्कीम, 2012 का हवाला दिया। इसमें बिहार की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी अधिवक्ताओं के लिए पेंशन और पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था शुरू करने की मांग की गई है। याचिका में जूनियर अधिवक्ताओं को शुरुआती 5 वर्षों तक हर महीने 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव रखा गया। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए 50,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन की मांग की गई है। अधिवक्ताओं और उनके परिवारों को चिकित्सा संबंधी खर्च से राहत देने के लिए स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
अधिवक्ता की मृत्यु पर परिवार को 10 लाख की सहायता
याचिका में किसी अधिवक्ता की मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग भी शामिल है। इसके साथ ही प्रदेश की विभिन्न बार एसोसिएशनों में ई-लाइब्रेरी विकसित करने के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है, ताकि अधिवक्ताओं को कानून और न्यायिक फैसलों से संबंधित सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सके।
चुनाव के बाद बार काउंसिल के सामने रख सकेंगे मांग
हाई कोर्ट ने फिलहाल इन मांगों पर कोई सीधा आदेश जारी करने के बजाय याचिकाकर्ता को उचित मंच पर अपनी बात रखने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव पूरे होने के बाद याचिकाकर्ता अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है। यदि बार काउंसिल अभ्यावेदन को खारिज करती है या मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो याचिकाकर्ता कानून के मुताबिक आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकेगा।