अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में Bharat की धार्मिक आजादी पर सवाल, RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश!

अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में Bharat की धार्मिक आजादी पर सवाल, RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश!

अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में India की धार्मिक आजादी पर सवाल

भारत को फिर ‘कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न’ घोषित करने की सलाह

नई दिल्ली। अमेरिका की सरकारी सलाहकार संस्था यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ़) ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने अमेरिकी प्रशासन को सिफारिश की है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लक्षित प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाए।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि आवश्यक हो, तो आरएसएस से जुड़े लोगों की अमेरिका में एंट्री रोकी जाए और उनकी संभावित संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। आयोग का आरोप है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कई मामलों में आरएसएस की भूमिका या प्रभाव देखा गया है।

क्या है यूएससीआईआरएफ़

यूएससीआईआरएफ़ अमेरिका की एक स्वतंत्र और द्विदलीय सरकारी संस्था है, जिसे 1998 में बने इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक्ट के तहत स्थापित किया गया था। इस आयोग का काम दुनिया के विभिन्न देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करना और अमेरिका के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को इस संबंध में नीति संबंधी सुझाव देना है।

इस आयोग में कुल नौ सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस के नेताओं द्वारा की जाती है। आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं होतीं, लेकिन अमेरिकी विदेश नीति पर इनका प्रभाव माना जाता है।

सातवीं बार भारत को सीपीसी घोषित करने की सिफारिश

रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने एक बार फिर भारत को ‘कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न’ (सीपीसी) की सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। सीपीसी उन देशों को कहा जाता है जहां धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर और लगातार उल्लंघन की स्थिति पाई जाती है।

इस बार आयोग ने कुल 18 देशों को इस श्रेणी में रखने की सिफारिश की है, जिनमें अफगानिस्तान, चीन, ईरान, पाकिस्तान और रूस जैसे देश भी शामिल हैं। यह सातवां अवसर है जब भारत को इस सूची में शामिल करने की सलाह दी गई है।

2025 की घटनाओं का हवाला

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 के दौरान भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हुई। आयोग के अनुसार कुछ राज्यों में लागू कानूनों और सामाजिक घटनाओं का असर अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई स्थानों पर धार्मिक स्थलों पर हमले और समुदायों के बीच तनाव की घटनाएं सामने आईं।

कानून और घटनाओं का उल्लेख

आयोग की रिपोर्ट में कई मुद्दों का जिक्र किया गया है, जिनमें गोहत्या से जुड़े कानूनों के नाम पर हिंसा, कुछ राज्यों में एंटी-कन्वर्जन कानूनों को सख्त बनाने, और धार्मिक तनाव से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े कुछ आरोपियों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

भारत सरकार का रुख

भारत सरकार ने इस वर्ष की रिपोर्ट पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि इससे पहले मार्च 2025 में जारी इसी तरह की रिपोर्ट पर भारत के विदेश मंत्रालय ने यूएससीआईआरएफ़ की टिप्पणियों को पक्षपाती और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।

क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है यह रिपोर्ट

यूएससीआईआरएफ़ की रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को प्रभावित करती है। हालांकि इसकी सिफारिशें अनिवार्य नहीं होतीं, लेकिन कई बार अमेरिकी विदेश नीति, कूटनीतिक रुख और प्रतिबंध संबंधी फैसलों पर इनका असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इन सिफारिशों को आगे बढ़ाता है तो इसका असर भारत-अमेरिका संबंधों, खासकर रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर पड़ सकता है। फिलहाल यह सिफारिशें सलाह के रूप में ही सामने आई हैं और इस पर अंतिम निर्णय अमेरिकी प्रशासन को लेना होगा।

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