चढ़ावे के प्रबंधन और रसीद पर उठे सवाल, कानूनी लड़ाई भी तेज हुई
अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे को लेकर उपजे विवाद में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब एक बड़ा संकेत दिया है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन दानदाताओं ने अपनी भेंट की गई मूल्यवान वस्तुओं की सुरक्षा और रसीद न मिलने पर आपत्ति जताई है, उन्हें उनकी सामग्रियां वापस लौटाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संवेदनशील विषय पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
मंदिर को दी कीमती वस्तुओं का कहीं पता नहीं
यह पूरा मामला तब गरमाया जब हाल ही में कुछ श्रद्धालुओं ने सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया कि उनके द्वारा मंदिर को समर्पित की गई कीमती वस्तुओं की न तो उन्हें कोई आधिकारिक रसीद दी गई और न वे सामग्रियां मंदिर परिसर में कहीं दिखाई दे रही हैं। इन दावों के बाद मंदिर में आने वाले चढ़ावे के रख-रखाव और मैनेजमेंट को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे, जिसके जवाब में अब ट्रस्ट ने अपनी स्थिति साफ की है। ट्रस्ट ने अपनी सफाई में कहा है कि मंदिर के गर्भगृह और अन्य हिस्सों में जगह सीमित है। ऐसे में दान में मिलने वाली हर एक वस्तु को हमेशा के लिए प्रदर्शित करके रखना व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है।
धार्मिक मान्यताओं और व्यवस्था के मुताबिक, इन वस्तुओं का समय-समय पर उपयोग किया जाता है और बाद में उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है। विवाद के केंद्र में जो मुख्य सामग्रियां थीं, उनमें सोने की परत चढ़े धार्मिक ग्रंथ, चांदी की सिल्लियां, चांदी की खड़ाऊं और कीमती हार जैसी वस्तुएं शामिल हैं। ट्रस्ट ने बताया कि कुछ धातुओं को सुरक्षित रखने के लिए उनका जरूरी रूपांतरण (मॉडिफिकेशन) भी किया गया है।
धातु की शुद्धता की जांच के बाद ही रसीद देना संभव
रसीद न मिलने के आरोपों पर ट्रस्ट ने तकनीकी कारण सामने रखा है। उनका कहना है कि सोना, चांदी या किसी भी मूल्यवान धातु की शुद्धता और उसके असली वजन की जांच किए बिना तुरंत रसीद जारी करना संभव नहीं होता है। पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया और जांच खत्म होने के बाद ही ऑफिशियल रिकॉर्ड तैयार किए जाते हैं और रसीद की कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है।
अदालत में कई याचिकाएं दाखिल
इस प्रशासनिक विवाद के बीच अब यह मामला कोर्ट की दहलीज पर भी पहुंच चुका है। चढ़ावे के मैनेजमेंट और कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर अदालत में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें एक स्वतंत्र कमेटी से जांच कराने, फाइनेंशियल ऑडिट करने और पूरे सिस्टम में पारदर्शिता लाने की मांग की गई है।
श्रद्धालुओं की आस्था बरकरार रखने के लिए
ट्रस्ट ने अंत में दोहराया है कि उनका एकमात्र लक्ष्य श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखना है। इसीलिए समय-समय पर सभी रिकॉर्ड्स को सामने लाया जा रहा है। इसके बावजूद अगर कोई दानदाता तय नियमों के तहत अपनी भेंट वापस मांगता है और उसका दावा सही पाया जाता है, तो कानून के दायरे में रहकर उसकी वस्तुएं लौटाने पर विचार किया जाएगा। अब इस मामले में आगे की दिशा ट्रस्ट के अंतिम फैसले और कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगी।