मुंबई में आईएएस अफसर तुकाराम मुंढे का खौफ, मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा, 20 सालों के करियर में 25 तबादले!

मुंबई। महाराष्ट्र में अपने सख्त फैसलों और ईमानदारी के लिए पहचाने जाने वाले आईएएस अफसर तुकाराम मुंढे इन दिनों अपने नए अभियानों को लेकर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। वर्तमान में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) कमिश्नर का पद संभाल रहे तुकाराम मुंढे ने महज दो महीनों के भीतर राज्य भर में 1100 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट पर औचक निरीक्षण किया है। उनके इस ताबड़तोड़ एक्शन ने मुंबई के बड़े और नामी फूड ब्रांड्स में हड़कंप मचा दिया है। स्थिति यह है कि 20 सालों के करियर में 25 बार तबादले झेल चुके इस अफसर के काम और सुरक्षा का मुद्दा अब महाराष्ट्र विधानसभा के पटल तक पहुंच गया है।

नामी रेस्टोरेंट पर कार्रवाई और रिकॉर्ड सैंपलिंग
25 मई को एफडीए कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालते ही तुकाराम मुंढे ने राज्य से मिलावटखोरी को खत्म करने का इरादा साफ कर दिया था। पदभार ग्रहण करने के तीसरे ही दिन यानी 28 मई से उन्होंने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया। इस दौरान मुंबई के प्रसिद्ध प्रतिष्ठानों जैसे रुस्तम एंड कंपनी, नूर मोहम्मदी, शालीमार, आदित्य बिड़ला की ‘वारसा’ और शेफ राहुल अकेरकर के रेस्टोरेंट ‘फ्लिंट’ पर विभागीय दल ने जांच की।
कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने 56 रेस्टोरेंट के फूड लाइसेंस रद्द कर दिए और करीब 49.57 करोड़ रुपये का अवैध खाद्य स्टॉक जब्त किया। संगठित गुटखा नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए उन्होंने मकोका के तहत कदम उठाए। इस कार्रवाई की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एफडीए की प्रयोगशाला में बीते 15 दिनों के भीतर 8700 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जबकि पूरे साल 2025 में यह आंकड़ा 15,000 था।

एफडीए के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव
कमिश्नर मुंढे ने न सिर्फ बाहर कार्रवाई की, बल्कि अपने विभाग के भीतर के वर्क कल्चर को भी पूरी तरह से सुधार दिया है। वह खुद सुबह 9.30 बजे दफ्तर पहुंचते हैं और अधिकारियों के लिए जनता की समस्याओं के निपटारे की समय सीमा तय कर दी गई है। आम लोगों की शिकायतों के लिए व्यवस्था को सुगम बनाया गया है, जिसके चलते अब विभाग को रोजाना 500 से 1100 शिकायतें मिल रही हैं। प्रयोगशालाओं में सैंपलों की जांच प्रक्रिया को गति देने के लिए काम अब एक की जगह दो शिफ्टों में किया जा रहा है। उनका कहना है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

किसान परिवार से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
बबीड जिले के रहने वाले तुकाराम मुंढे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे मुंढे ने बचपन में पिता के साथ खेतों में पसीना बहाया और स्थानीय बाजारों में सब्जियां बेचकर अपनी पढ़ाई पूरी की। सोलापुर में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने जल संकट से जूझते सैकड़ों गांवों को टैंकर-मुक्त बना दिया था, जिसके बाद उन्हें ‘वॉटर मैन’ के नाम से जाना जाने लगा।
वे 2015 में तब विवादों में आए जब उन्होंने तत्कालीन राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे के काफिले को रोक दिया था। 2016 में नवी मुंबई नगर निगम कमिश्नर रहने के दौरान जब उन्होंने अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम चलाई, तो तत्कालीन विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। हालांकि, तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका पक्ष लिया था। बाद में 2022 में स्वास्थ्य आयुक्त रहते हुए उन्होंने सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर नकेल कसी और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य की।

विधानसभा में सुरक्षा और तबादले पर हंगामा
ताजा कार्रवाइयों के बाद तुकाराम मुंढे का नाम एक बार फिर विधानसभा की चर्चाओं के केंद्र में आ गया। सदन में विपक्ष ने आशंका जताई कि उन पर हो रहे दबाव के कारण सरकार उनका ट्रांसफर कर सकती है। एनसीपी-एसपी विधायक जितेंद्र आव्हाड ने मांग की कि उन्हें कम से कम 3 साल तक इसी पद पर रहने दिया जाए। उन्होंने खुलासा किया कि निष्पक्ष काम करने के कारण अधिकारी को जान से मारने की धमकियां भी मिल रही हैं। बीजेपी विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने भी उनके रुख का समर्थन किया। इस पर संबंधित विभागीय मंत्री नरहरी जिरवाल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अधिकारी के तबादले का कोई प्रस्ताव नहीं है और उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी।

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