आईएएस के 68, आईपीएस के 48 और आईएफएस के 87 पद खाली!
भोपाल। ब्यूरोक्रेट्स की कमी MP सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भारी पड़ रही है। इस कमी के कारण एक अफसर पर कई-कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहा है। प्रदेश में अखिल भारतीय सेवा के तीन कैडर (आईएएस, आईपीएस और आईएफएस) के 203 पद खाली हैं।
केंद्र सरकार इन पदों पर भर्ती नहीं कर पा रही, और राज्य सरकार भी राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा और राज्य वन सेवा के अफसरों को समय पर पदोन्नति दिलाने की कार्रवाई में देरी कर पद रिक्त बनाए रखने का काम कर रही है। मप्र में सभी प्रमोटी अफसरों को कलेक्टर, एसपी और डीएफओ बनने का मौका भले ही नहीं मिल पा रहा है, लेकिन यहां अखिल भारतीय सेवा के अफसरों की कमी चिंताजनक है।

इतनी है अफसरों की कमी
एक जनवरी 2025 की स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में आईएएस के 68 पद, आईपीएस के 48 और आईएफएस कैडर के 87 पद खाली हैं। संसद में सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के विभिन्न कैडर में लगभग 1,300 पद खाली हैं। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल आईएएस की स्वीकृत संख्या 6,877 है, जबकि वर्तमान में 5,577 अधिकारी कार्यरत हैं। इससे लगभग 1,300 पद खाली रह जाते हैं, जो लगभग 18.9 प्रतिशत है।
तीनों अखिल भारतीय सेवाओं में यह कमी ज्यादा
यह कमी केवल आईएएस तक ही सीमित नहीं है। सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि तीनों अखिल भारतीय सेवाओं आईएएस, आईपीएस और आईएफएस में पद खाली हैं। तीनों सेवाओं में कुल मिलाकर 15,169 अधिकारियों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 2,834 पद रिक्त हैं। अगर मप्र की बात करें तो यहां आईएएस के 459 पद स्वीकृत हैं उनमें से 391 पद भरे हैं। वहीं आईपीएस के 319 पदों में से 271 भरे हैं जबकि आईएफएस के 296 पदों में से 209 ही भरे हुए हैं।
समय पर डीपीसी नहीं होने से भी असर
इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती के अलावा राज्यों में प्रमोशन से भरने वाले पदों के जरिये इस रिक्तता को कम किया जा सकता है। लेकिन, सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग और वन विभाग के अफसरों की लापरवाही और देरी के चलते तीनों ही कैडर की डीपीसी समय से नहीं हो रही है और इसका असर पद रिक्त होने के रूप में साफ दिख रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक अनुभव की टाइम लिमिट को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है।
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