फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा का महाजाल, रिश्तेदारों से लेकर ड्राइवर तक को ठगा, 28 एफआईआर

फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा का महाजाल, रिश्तेदारों से लेकर ड्राइवर तक को ठगा, 28 एफआईआर

     बरेली। सरकारी सेवा में उच्च पद दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की चपत लगाने वाली फर्जी प्रशासनिक अधिकारी विप्रा शर्मा और उसके परिवार का जाल पूरे उत्तर प्रदेश में फैल चुका था। इस गिरोह ने ठगी की अंधी दौड़ में अपने सगे-संबंधियों तक को नहीं बख्शा। हाल ही में पुलिस के पास पहुंचे नए मामलों से साफ हुआ है कि इस जालसाज परिवार के हौसले किस कदर बुलंद थे। बीते मंगलवार को बरेली के बारादरी थाने में इस गिरोह के खिलाफ चार नई प्राथमिकियां दर्ज की गईं, जिनमें संभल और अलीगढ़ के पीड़ित शामिल हैं। इनमें से एक पीड़ित तो विप्रा शर्मा का करीबी रिश्तेदार ही निकला। इन नए मामलों को मिलाकर अब तक विप्रा, उसकी दो बहनों और पिता के खिलाफ कुल 28 मुकदमे लिखे जा चुके हैं।

रिश्तेदारी की आड़ में बेटों के भविष्य से खिलवाड़
     पहला नया मामला अलीगढ़ के देहलीगेट इलाके से सामने आया है। वहां के रहने वाले मुकेश कुमार शर्मा ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। मुकेश के दो बेटे, तरुण और यश, साल 2020 से सरकारी सेवा की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी। इसी दौरान मुकेश के साले के समधी वीरेंद्र शर्मा (जो विप्रा शर्मा का पिता है) ने उनसे संपर्क किया। वीरेंद्र ने गर्व से दावा किया कि उसकी बेटी एक बड़ी प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस) है और वह दोनों लड़कों की सरकारी नौकरी आसानी से लगवा सकती है। जब मुकेश ने खर्च के बारे में पूछा, तो वीरेंद्र ने उन्हें सीधे विप्रा से बात करने को कहा।

बीस लाख रुपये डूबे, हाथ आए जाली कागजात
      मुकेश की बातचीत जब विप्रा शर्मा से हुई, तो उसने दोनों भाइयों की नौकरी पक्की कराने के बदले बीस लाख रुपये की मांग की। बच्चों के सुरक्षित भविष्य की चाह में मुकेश ने यह रकम चुका दी। कुछ समय बाद उनके बेटों के नाम से सरकारी विभाग के नियुक्ति पत्र भी आ गए, जिससे परिवार में खुशी छा गई। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। जब दोनों भाई काम शुरू करने पहुंचे, तो उन्हें वहां से भगा दिया गया। जांच करने पर पता चला कि जो नियुक्ति पत्र विप्रा ने उन्हें सौंपे थे, वे पूरी तरह जाली और फर्जी थे।

बहन के रसूख का डर दिखाकर संभल में दस लाख की चपत
     दूसरा मामला संभल के निवासी प्रवेश कुमार से जुड़ा है। प्रवेश की मुलाकात शिखा पाठक नाम की एक महिला से हुई थी। शिखा ने प्रवेश को अपने जाल में फंसाते हुए कहा कि वह उसके बेटे की सरकारी नौकरी लगवा देगी। इस काम के लिए शिखा ने दस लाख रुपये की मांग की। प्रवेश का भरोसा जीतने के लिए शिखा ने अपनी बहन विप्रा शर्मा के नाम का सहारा लिया। उसने दावा किया कि उसकी बहन विप्रा एक बड़ी अधिकारी है और शासन में उसकी बहुत ऊंची पहुंच है। प्रवेश ने पैसे दे दिए, लेकिन न तो बेटे को नौकरी मिली और न ही रकम वापस आई। इस मामले में भी विप्रा द्वारा भेजा गया नियुक्ति पत्र फर्जी निकला।

पीलीभीत के दंपती से वसूले चौदह लाख रुपये
     तीसरी ठगी पीलीभीत के रहने वाले कनिष्क सिन्हा के साथ हुई। कनिष्क ने बारादरी पुलिस को बताया कि ग्रीन पार्क इलाके में रहने वाली विप्रा शर्मा ने खुद को बड़ा अधिकारी बताते हुए उनकी पत्नी प्रियंका सक्सेना की नौकरी लगवाने का वादा किया था। इस काम के एवज में विप्रा ने कुल चौदह लाख रुपये वसूले। इस रकम में से आठ लाख रुपये विप्रा ने अपने आवास पर नकद लिए थे, जबकि बाकी के छह लाख रुपये ऑनलाइन माध्यम से अपने खाते में ट्रांसफर करवाए थे। इस मामले में भी पीड़िता को झांसा देने के लिए एक बनावटी नियुक्ति पत्र थमा दिया गया था।

गाड़ी चलाने वाले गरीब चालक को भी नहीं बख्शा
     इस गिरोह की बेरहमी का अंदाजा चौथे मामले से लगाया जा सकता है, जो बारादरी के पुराना शहर निवासी अमान खान ने दर्ज कराया है। अमान पेशे से एक चालक हैं और विप्रा शर्मा अक्सर उनकी गाड़ी किराए पर लेकर बाहर जाया करती थी। यात्रा के दौरान विप्रा खुद को शासन की बड़ी अधिकारी बताती थी। एक दिन उसने अमान से कहा कि वह उसकी ईमानदारी और काम से बहुत खुश है, इसलिए वह उसकी एक सरकारी विभाग में पक्की नौकरी लगवा देगी। एक बड़े अधिकारी के मुंह से यह बात सुनकर अमान झांसे में आ गया और उसने कर्ज मांगकर साठ हजार रुपये विप्रा को दे दिए। काफी समय बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी, तब अमान को ठगी का अहसास हुआ। फिलहाल, बारादरी थाना पुलिस ने चारों पीड़ितों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट दर्ज कर ली है और मामले की गहराई से जांच कर रही है।

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