नई दिल्ली। संसद की उच्चस्तरीय स्थायी समिति ने देश की प्रमुख परीक्षाओं के आयोजन और मूल्यांकन प्रणाली संबंधी बढ़ते विवादों पर सख्त रुख अपनाया है। समिति, जिसका नेतृत्व कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कर रहे हैं, ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से लिखित में विस्तार से स्पष्टीकरण मांगा है।
अपने स्तर पर कोई जांच की थी या नहीं !
स्थायी समिति ने एनटीए से पूछा है कि नियमावली के मुताबिक प्रश्नपत्र लीक की परिभाषा क्या है और 2018 के बाद से आयोजित परीक्षाओं में क्या किसी भी प्रकार के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएँ दर्ज हुईं। साथ ही समिति ने 2024 की स्नातक चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में उठे विवाद के संदर्भ में पूछा कि सीबीआई की जांच के अलावा एनटीए ने अपने स्तर पर कोई आंतरिक जांच की थी या नहीं। एजेंसी से पिछले तीन वर्षों में तैनात स्टाफ की संख्या, 2022 के बाद की नियुक्तियों की सूची और उच्च शिक्षा विभाग को सौपी गई वार्षिक रिपोर्ट भी मांगी गई है। समिति ने जून 2024 में बनी राधाकृष्णन समिति की 101 अनुशंसाओं पर अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत लेखा-जोखा भी पेश करने को कहा है।
निविदा नियमों के बादलाव की जानकारी मांगी
सीबीएसई से भी कई कड़े प्रश्न पूछे गए हैं। समिति ने बोर्ड द्वारा उत्तर पुस्तकों के ऑनलाइन मूल्यांकन की व्यवस्था और उस से जुड़े निविदा नियमों में आए परिवर्तनों की जानकारी मांगी है। विशेषकर उस निजी तकनीकी फर्म के चयन के समय उसकी पृष्ठभूमि और योग्यता की जाँच कैसे की गई, यह बताया जाए। समिति ने यह भी जानना चाहा कि क्या बोर्ड यह जानता था कि उस कंपनी या उसके निदेशक पहले किसी ऐसी तकनीकी संस्था से जुड़े रहे हैं, जिनकी मूल्यांकन पद्धति पर पहले विवाद उठे थे।
खराब प्रदर्शन वाली फर्मों को बाहर करने का नियम क्यों हटाया
निविदा दस्तावेजों में तीसरी बार प्रकाशित प्रस्ताव में खराब प्रदर्शन करने वाली फर्मों को बाहर करने के नियम क्यों हटा दिए गए, काली सूची संबंधी प्रावधानों में परिवर्तन क्यों किए गए और वार्षिक कारोबार की न्यूनतम सीमा 50 करोड़ रुपये तय करने का तर्क क्या रहा ये भी सांसदों ने स्पष्ट करने को कहा है। समिति ने डिजिटल स्कैनिंग की गुणवत्ता, डेटा केंद्र सुरक्षा मानक और तकनीकी अनुभव के मानदंडों में हुए संशोधनों पर भी सवाल उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार बोर्ड को फरवरी, मई और अगस्त 2025 की निविदा फाइलें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, पर अब तक वे दस्तावेज साझा नहीं किए गए हैं। समिति ने मूल्यांकन व्यवस्थाओं के प्रायोगिक परीक्षण (पायलट) की रिपोर्ट, उस पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा और क्या परीक्षण रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय को भेजी गई, इसकी जानकारी भी मांगी है।