मुंबई। सिनेमाघरों में इन दिनों बड़े सितारों और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों की होड़ लगी है। एक तरफ ‘केजीएफ’ फेम यश की ‘टॉक्सिक’, तो दूसरी ओर सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ और इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ जैसी फिल्में मैदान में हैं। माना जा रहा था कि करोड़ों के बजट और नामचीन कलाकारों के दम पर यही फिल्में दर्शकों पर राज करेंगी। लेकिन इस पूरे मुकाबले के बीच महज 2 करोड़ रुपए में तैयार हुई भक्ति प्रधान फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने सिनेमाघरों में ऐसा पासा पलटा है कि हर कोई हैरान है।
जहां 500 से 1000 करोड़ रुपए की लागत से बनी ‘टॉक्सिक’ के कई शो खाली जा रहे हैं, वहीं 2 करोड़ रुपए की ‘हनुमान अंश’ के शो दर्शकों से खचाखच भरे हैं। अब तक यह फिल्म करीब 42 करोड़ रुपए का कारोबार कर चुकी है, जो इसकी लागत का लगभग 800 प्रतिशत मुनाफा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फिल्म के मुख्य कलाकार और निर्देशक सिनेमा प्रेमियों के लिए एकदम नए चेहरे हैं। इसके बावजूद निर्माताओं ने किसी बड़े विज्ञापन या प्रचार अभियान का सहारा नहीं लिया। फिल्म के पोस्टर और झलकियां भी सिर्फ उनके अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ही साझा किए गए थे।
शुरुआत रही धीमी, पर चौथे हफ्ते में पलटी बाजी
संत नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं से जुड़ी इस फिल्म का शुरुआती दौर आसान नहीं था। पहले हफ्ते में टिकट खिड़की पर इसकी चाल काफी धीमी रही और दूसरे हफ्ते में तो कुल कमाई लगभग 40 लाख रुपए तक सिमट गई थी, जिससे लगा कि फिल्म पर्दे से हट जाएगी। हालांकि, तीसरे हफ्ते के बाद दर्शकों की तारीफों के चलते माहौल पूरी तरह बदल गया। चौथे हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। स्थिति यह है कि थिएटर मालिकों को बड़ी फिल्मों के शो और स्क्रीन काटकर ‘हनुमान अंश’ को देने पड़ रहे हैं। ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी इस फिल्म की मांग बड़ी फिल्मों से काफी आगे निकल चुकी है।
50 साल पहले ‘जय संतोषी मां’ ने भी रचा था ऐसा ही इतिहास
हिंदी सिनेमा में ऐसा चमत्कार पहली बार नहीं हुआ है जब किसी छोटी आध्यात्मिक फिल्म ने बड़े सितारों की फिल्मों को पीछे छोड़ा हो। करीब 50 साल पहले 15 August 1975 को भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला था। उस दिन अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र स्टारर फिल्म ‘शोले’ रिलीज हुई थी। विशाल बजट, भव्य निर्माण और बड़े सितारों के कारण कोई अन्य निर्माता अपनी फिल्म उस दौर में रिलीज करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
उसी दिन महज 25 लाख रुपए में बनी भक्ति फिल्म ‘जय संतोषी मां’ भी रिलीज हुई। बिना किसी बड़े सितारे के बनी इस फिल्म को दर्शकों ने पलकों पर बिठाया और इसने लगभग 5 करोड़ रुपए का शानदार व्यापार किया। उस समय सिनेमाघरों के बाहर दर्शक चप्पलें उतारकर प्रवेश करते थे और पर्दे पर आरती तक गाई जाती थी। ‘मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की’ जैसे गीतों के साथ यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे सफल भक्ति फिल्मों में शुमार हो गई।
दर्शकों की तारीफ बनी सबसे बड़ा प्रचार माध्यम
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ‘हनुमान अंश’ की सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान ‘वर्ड ऑफ माउथ’ यानी दर्शकों की आपसी चर्चा का है। जिन लोगों ने यह फिल्म देखी, उन्होंने अपने अनुभव दूसरों के साथ साझा किए, जिससे धीरे-धीरे दर्शकों का रुझान बढ़ता चला गया। आमतौर पर फिल्मों का कारोबार पहले हफ्ते के बाद घटने लगता है, लेकिन ‘हनुमान अंश’ ने तीसरे और चौथे हफ्ते में अपनी कमाई बढ़ाकर सभी पुराने ट्रेंड्स को तोड़ दिया है।