अभ्यर्थी की अपनी कमाई और यहां तक कि पति की आय भी नहीं जोड़ी जाएगी!
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने क्रीमी लेयर को लेकर स्थिति साफ कर दी है। मामला एमपीपीएससी की सहायक प्रोफेसर (कानून) भर्ती से जुड़ा था, जहां चयन को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि चयनित उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आती है, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
अदालत ने यह कहा
हाईकोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय ही आधार होगी। अभ्यर्थी की अपनी कमाई और पति की आय शामिल नहीं की जाएगी।
क्रीमी लेयर के नियम
अदालत ने फैसले में कुछ अहम बिंदु स्पष्ट किए:
- माता-पिता की आय ही मुख्य आधार होगी
- अभ्यर्थी की खुद की आय को नजरअंदाज किया जाएगा
- पति की आय सामान्यतः नहीं जोड़ी जाएगी
- विशेष परिस्थितियों में ही अन्य आय देखी जा सकती है
अहम है यह फैसला
यह निर्णय हजारों उम्मीदवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो क्रीमी लेयर को लेकर असमंजस में रहते हैं। इसमें साफ किया गया कि फोकस परिवार की पृष्ठभूमि पर रहेगा, न कि व्यक्तिगत आय पर।
नियुक्ति को सही ठहराया गया
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि चयनित उम्मीदवार क्रीमी लेयर में नहीं आती और याचिका खारिज करते हुए नियुक्ति को सही ठहराया गया।